
लोकसभा में एक सवाल पूछा गया कि क्या पुजारियों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से वेतन मिलता है? इस सवाल के जवाब में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारकों और मंदिरों में पुजारियों को वेतन नहीं दिया जाता है। उन्होंने कहा कि एएसआई का मुख्य कार्य स्मारकों और मंदिरों का संरक्षण और रखरखाव करना है, न कि पुजारियों को वेतन देना।
गजेंद्र सिंह शेखावत ने आगे बताया कि एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारकों और मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति और वेतन का निर्णय संबंधित मंदिरों और संस्थानों द्वारा लिया जाता है। उन्होंने कहा कि एएसआई का कार्य स्मारकों और मंदिरों का संरक्षण और रखरखाव करना है, और इसके लिए वह आवश्यक कदम उठाता है। उन्होंने यह भी कहा कि एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारकों और मंदिरों में पुजारियों को वेतन देने का कोई प्रावधान नहीं है।
इस सवाल के जवाब में गजेंद्र सिंह शेखावत ने यह भी बताया कि एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारकों और मंदिरों का संरक्षण और रखरखाव करने के लिए आवश्यक धनराशि का आवंटन किया जाता है। उन्होंने कहा कि एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारकों और मंदिरों का संरक्षण और रखरखाव करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं, और इसके लिए आवश्यक धनराशि का आवंटन किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारकों और मंदिरों का संरक्षण और रखरखाव करने के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए जाते हैं।
कुल मिलाकर, गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारकों और मंदिरों में पुजारियों को वेतन नहीं दिया जाता है, और इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारकों और मंदिरों का संरक्षण और रखरखाव करने के लिए आवश्यक धनराशि का आवंटन किया
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