
लोकसभा में राहुल गांधी ने मंगलवार (9 दिसंबर) को चुनाव सुधार पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए, केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर संदेह जाहिर किया, साथ ही सत्ता पक्ष पर वोट चोरी जैसे गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने कहा कि वोट चोरी से बड़ा कोई राष्ट्र विरोधी काम नहीं है, और यह हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास है।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में आरएसएस पर भी निशाना साधा और कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को भी कब्जे में लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पर कब्जा किया गया है और यह लोकतंत्र को खत्म करने के लिए किया जा रहा है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर को चुनने की प्रक्रिया में सत्ता पक्ष की चलती है, और यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। उन्होंने सवाल किया कि चीफ जस्टिस को चुनाव आयुक्त चुनने की प्रक्रिया में क्यों नहीं शामिल किया जाता है?
राहुल गांधी ने हरियाणा में चुनाव चोरी का आरोप लगाया और कहा कि ब्राजील मॉडल का जिक्र करते हुए बताया कि ब्राजील की मॉडल का नाम 22 बार वोटर लिस्ट में आया, एक महिला का नाम 200 बार वोटर लिस्ट में आया है। उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि चुनाव प्रक्रिया में कितनी गड़बड़ी हो रही है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि हमारा देश एक फैब्रिक की तरह है, और इसके सारे धागे एक जैसे हैं। सभी लोग बराबर हैं, और हमें लोकतंत्र की रक्षा करनी होगी।
राहुल गांधी के भाषण ने लोकसभा में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मुद्दे पर कैसे प्रतिक्रिया करती है। लोकतंत्र की रक्षा और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए राहुल गांधी के बयान ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है।
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