विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम दुनिया देश शहर और राज्य चुनाव LIVE कारोबार More •••
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
अमेरिका ने भारत समेत तीन देशों से आने वाले सोलर सेल और पैनल पर भारी शुल्क तय कर दिया है। अमेरिका का कहना है कि इन देशों के उत्पादकों और निर्यातकों ने अनुचित सरकारी सब्सिडी का फायदा उठाया और अमेरिकी सोलर उद्योग को नुकसान पहुंचाया। यह फैसला क्रिस्टलाइन सिलिकॉन फोटोवोल्टिक सेल से जुड़ी एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी की जांच के बाद आया है। भारत के लिए यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिकी बाजार में भारतीय सोलर उत्पादों पर अब बहुत ऊंचा शुल्क लग सकता है।
ये दरें अमेरिका के वाणिज्य विभाग की शुक्रवार को जारी अंतिम सकारात्मक जांच के फैसले में तय की गई हैं। ये भी पढ़ें- ब्रिक्स डिनर: वैश्विक नेताओं ने भारतीय व्यंजनों का चखा स्वाद, मेन्यू में मिलेट पुलाव से जलेबी तक क्या शामिल?
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
अमेरिका में यह जांच एक याचिका के बाद शुरू हुई थी। अमेरिकी सोलर विनिर्माण और व्यापार से जुड़े एक गठबंधन ने आरोप लगाया था कि भारत में मुख्यालय वाली कंपनियों के साथ-साथ इंडोनेशिया और लाओस में काम करने वाले बड़े पैमाने पर चीनी स्वामित्व वाले निर्माताओं ने अनुचित व्यापार गतिविधियां की हैं। इसके बाद अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी की जांच शुरू की। अमेरिका के आरोप के अनुसार इन देशों से सोलर उत्पाद कम कीमत पर अमेरिकी बाजार में पहुंच रहे थे और उत्पादकों को ऐसी सरकारी मदद मिली, जिस पर शुल्क लगाया जा सकता है।
अभी इस मामले में एक और अहम फैसला होना बाकी है। अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार आयोग अब यह जांच करेगा कि इन सब्सिडी वाले आयात से अमेरिकी सोलर उद्योग को वास्तव में नुकसान हुआ या नहीं। आयोग को अगले 45 दिनों में अंतिम फैसला करना है और उसकी अंतिम चोट संबंधी वोटिंग 14 अक्टूबर को होने की उम्मीद है। अगर आयोग का फैसला भी सकारात्मक रहा तो अमेरिका का वाणिज्य विभाग 2 नवंबर तक शुक्रवार को तय की गई दरों के आधार पर एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी के आदेश जारी कर सकता है। अगर आयोग का फैसला नकारात्मक रहा तो पूरी जांच खत्म कर दी जाएगी।