विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम कारोबार बिज़नेस डायरी बाजार स्टार्टअप्स कॉर्पोरेट पर्सनल फाइनेंस More •••
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें भारत और अमेरिका के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट कर दिया है कि इस समझौते की घोषणा तभी की जाएगी, जब अमेरिका हमारे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारत को तरजीही दरें (Preferential Rates) प्रदान करेगा। नई दिल्ली में आयोजित 'मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का लाभ उठाने' पर राष्ट्रीय कार्यशाला में बोलते हुए गोयल ने वैश्विक स्तर पर व्यापार के लिए भारत के विजन को साझा किया।
अमेरिका भारतीय उत्पादों के लिए एक बहुत बड़ा बाजार है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने अमेरिका को 87 बिलियन डॉलर ( करीब 8,21,715 करोड़ रुपये) मूल्य की वस्तुओं का निर्यात किया था। अमेरिकी बाजार में भारत का सीधा मुकाबला वियतनाम, बांग्लादेश, थाईलैंड, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया और श्रीलंका जैसे देशों से है। यदि अमेरिका भारत को तरजीही दरें देता है, तो भारतीय सामानों को वहां के बाजार में भारी मूल्य प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल होगी, जिससे निर्यात में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
सरकार ने वर्तमान वर्ष के लिए 1 ट्रिलियन डॉलर (लगभग ₹94.45 लाख करोड़) के निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस दिशा में शुरुआत काफी सकारात्मक रही है और चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में ही हमारा निर्यात 317 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की समान अवधि के 280 अरब डॉलर से उल्लेखनीय रूप से अधिक है। सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य साल 2030 तक निर्यात को 2 ट्रिलियन डॉलर (188.90 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचाना है। इसके लिए निर्यातकों को आगामी 100 'भव्य' (BHAVYA) औद्योगिक पार्कों में प्राथमिकता के आधार पर सहायता और प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं दी जाएंगी।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने चेताया कि व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों की यह खिड़की हमेशा के लिए खुली नहीं रहेगी, क्योंकि देर-सबेर प्रतिस्पर्धी देश भी ऐसे समझौते कर लेंगे। इसलिए भारत को अगले 5 से 10 वर्षों में मजबूत और नई आपूर्ति शृंखलाएं विकसित करनी होंगी। इसके अलावा, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन जैसे विकसित बाजारों में गुणवत्ता के मानक बहुत ऊंचे हैं, जिस पर खरे उतरे बिना निर्यात बढ़ाना संभव नहीं होगा।