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अलर्ट: कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल फिर भी हो सकता है हार्ट अटैक, लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में भी सामने नहीं आता ये दुश्मन

लिपोप्रोटीन-ए खून में मौजूद ऐसा कोलेस्ट्रॉल है, जिसका स्तर मुख्य रूप से जीन से तय होता है। इसके बढ़ने पर धमनियों में प्लाक, सूजन और खून के थक्कों का खतरा बढ़ सकता है। यह हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ाता है
अलर्ट: कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल फिर भी हो सकता है हार्ट अटैक, लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में भी सामने नहीं आता ये दुश्मन हिंदीबात विशेष
तस्वीर: हिंदीबात संपादकीय डेस्क (प्रतीकात्मक संदर्भ)

विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम लाइफ स्टाइल हेल्थ एंड फिटनेस फैशन फूड यात्रा रिलेशनशिप More •••

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🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु

लिपोप्रोटीन टेस्ट - फोटो : Freepik.com लिपोप्रोटीन-ए हार्ट के लिए साइलेंट खतरा अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक हर पांच में से एक व्यक्ति में लिपोप्रोटीन-ए या एलपी-ए का स्तर ज्यादा हो सकता है।

एलपी-ए बढ़ा होने पर यह धमनियों में प्लाक का जमाव बढ़ाने लगता है। इसके साथ सूजन और खून के थक्के बनने की प्रक्रिया भी बढ़ सकती है। लंबे समय में यह धमनियों को संकरा कर सकता है जिससे हृदय और मस्तिष्क तक खून पहुंचने में रुकावट आ सकती हैं। इससे हार्ट अटैक होने का जोखिम बढ़ जाता है। इसका स्तर पूरी तरह से आनुवंशिक (जींस) पर निर्भर होता है, जो माता-पिता से बच्चों में आता है। चिंता की बात ये भी है कि खान-पान, वजन या व्यायाम करने से भी इसके स्तर पर कोई खास असर नहीं पड़ता है। मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक लिपोप्रोटीन-ए टेस्ट की नॉर्मल रेंज आमतौर पर 30 मिलीग्राम/डीएल या 75 नैनोमोल्स/लीटर (nmol/L) से कम माना जाता है। 30 मिलीग्राम/डीएल से अधिक होना आपके लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला माना जाता है।

💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट

एलपी-ए से हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com क्या कहते हैं हृदय रोग विशेषज्ञ? हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ एम.आर खान बताते हैं,  एलपी-ए एक साइलेंट समस्या है, जो लाखों लोगों के शरीर में मौजूद हो सकती है और लंबे समय तक बिना किसी संकेत के छिपी रहती है। हैरानी की बात यह है कि बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में इसकी जांच शामिल नहीं होती है,  इसलिए कई लोगों को कभी पता ही नहीं चल पाता कि उनका एलपी-ए बढ़ा हुआ है। इसलिए ऐसा जरूरी नहीं है कि जिस व्यक्ति का एलपी-ए ज्यादा है, वह मोटा या अस्वस्थ दिखता हो या उसकी जीवनशैली खराब हो। स्वस्थ-फिट दिखाई देने के बावजूद लोगों में इसका स्तर हाई हो सकता है। अक्सर लोगों में एलपी-ए का स्तर ज्यादा होने का पता तब चलता है, जब उन्हें अचानक हार्ट अटैक या स्ट्रोक हो जाता है।  दिखने में फिट-फिर भी खतरा अमेरिका के मशहूर पर्सनल ट्रेनर इसका बड़ा उदाहरण हैं। 51 साल की उम्र में वे काफी फिट और स्वस्थ दिखते थे। लेकिन व्यायाम करते समय उन्हें अचानक ऐसा हार्ट अटैक आया।

हृदय रोगों के जोखिम - फोटो : Adobe Stock एलपी-ए क्या है और शरीर में इसका क्या काम है? एलपी-ए एक ऐसा कण होता है, जो खून के जरिए कोलेस्ट्रॉल को शरीर में ले जाने का काम करता है। इसे मुख्य रूप से लिवर में बनता है। ऑरलैंडो हेल्थ हार्ट एंड वैस्कुलर इंस्टीट्यूट में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रयान स्मिथ कहते हैं, शरीर में एलपी-ए की कुछ सामान्य भूमिकाएं भी हो सकती हैं। यह घाव भरने और संक्रमण से लड़ने की प्रक्रिया में मदद करता है। समस्या तब पैदा होती है, जब इसका स्तर बहुत ज्यादा हो जाए।

अब सवाल ये है कि फिर आप अपने जोखिमों को कैसे जान सकते हैं?

एलपी-ए टेस्ट कब कराएं - फोटो : Freepik.com कैसे पता चलेगा कि एलपी- ए बढ़ा हुआ है? मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि एलपी-ए का स्तर जानने के लिए खून की जांच कराना एक अच्छा तरीका माना जाता है।

डॉक्टर कहते हैं, फिलहाल एलपी-ए को कम करने के लिए कोई ऐसी दवा उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर कुछ दवाएं दे सकते हैं जो आपके जोखिमों को कम करने में मददगार हो सकती हैं। कई ऐसी नई दवाओं पर परीक्षण चल रहे हैं, जिन्हें खास तौर पर एलपी-ए को कम करने के लिए विकसित किया जा रहा है। ये दवाएं लिवर को एलपी-ए बनाने से रोकने की कोशिश करती हैं। -------------- स्रोत: American Heart Association lipoprotein(a) discovery project: A national initiative to advance awareness and lipoprotein(a) testing for patients with cardiovascular disease अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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📌 पारदर्शी स्रोत व संपादन: अमर उजाला (Amar Ujala Breaking News) | हिंदीबात संपादकीय टीम द्वारा 5W1H तथ्य सत्यापन मॉडल के तहत परीक्षित व प्रकाशित।
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