विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम कारोबार बिज़नेस डायरी बाजार स्टार्टअप्स कॉर्पोरेट पर्सनल फाइनेंस More •••
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को अपने बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के लिए बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की मंजूरी मिल गई है। यह आईपीओ करीब 30,000 करोड़ रुपये का होने का अनुमान है। इस मंजूरी से भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में से एक का रास्ता साफ हो गया है। सेबी ने 4 सितंबर को एनएसई को आईपीओ के लिए मंजूरी दी है।
एनएसई भारत के इक्विटी डेरिवेटिव बाजार पर एकछत्र राज करता है और दुनिया का सबसे सक्रिय एक्सचेंज है। वित्तीय मोर्चे पर, एक्सचेंज का शुद्ध लाभ (PAT) वित्त वर्ष 2025-26 में 15% गिरकर ₹10,302 करोड़ रहा। हालांकि, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में शानदार वापसी करते हुए एनएसई का शुद्ध लाभ 7% बढ़कर ₹3,120 करोड़ और कुल आय 9% बढ़कर ₹5,252 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। लगभग 1.8 लाख शेयरधारकों वाले इस एक्सचेंज के आईपीओ का बाजार को बेसब्री से इंतजार है।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
NSE IPO - फोटो : amarujala.com कितना बड़ा होगा यह आईपीओ? मामले से परिचित लोगों के अनुसार, इस आईपीओ का आकार करीब 30,000 करोड़ रुपये हो सकता है। यह अनुमानित आकार एनएसई के बाजार पूंजीकरण को 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक दर्शाता है। यह लंबे समय से प्रतीक्षित सार्वजनिक पेशकश एक नया रिकॉर्ड बनाएगी। यह अक्तूबर 2024 में लॉन्च हुए हुंडई मोटर्स इंडिया के पिछले रिकॉर्ड को पार कर जाएगी। हुंडई मोटर इंडिया का निर्गम 27,870 करोड़ रुपये का था।
सूत्रों के अनुसार, यह महा-आईपीओ 15 सितंबर को लॉन्च हो सकता है, जबकि एक्सचेंज पर इसकी लिस्टिंग 24-25 सितंबर को लक्षित की गई है। कंपनी की योजना पितृपक्ष (जो 26 सितंबर से शुरू हो रहा है) से पहले लिस्टिंग प्रक्रिया को पूरा करने की है। आईपीओ का प्राइस बैंड आगामी 11 सितंबर के आसपास घोषित होने की उम्मीद है। बाजार के बैंकरों का अनुमान है कि शेयरों की कीमत ₹2,000 प्रति शेयर के आसपास रखी जा सकती है, जो अनलिस्टेड ग्रे मार्केट में चल रहे मौजूदा भाव के अनुरूप है। इस आईपीओ का प्रबंधन करने के लिए कुल 20 मर्चेंट बैंकरों की नियुक्ति की गई है।
NSE IPO - फोटो : amarujala.com लगभग 10 साल तक क्यों अटका रहा एनएसई का लिस्टिंग प्लान? एनएसई का लिस्टिंग का सपना साल 2016 से अटका हुआ था। इसका मुख्य कारण कुख्यात 'को-लोकेशन विवाद' और 'डार्क-फाइबर' मामला था, जिसमें कुछ चुनिंदा ब्रोकरों को एक्सचेंज के सिस्टम तक तेज और तरजीही पहुंच देने के आरोप लगे थे। इस हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने सेबी द्वारा दायर की गई अपीलों को खारिज कर दिया, जिससे एनएसई की राह पूरी तरह साफ हो गई। इससे पहले जुलाई में, एनएसई ने सेबी के साथ इस विवाद को सुलझाने के लिए ₹1,491.21 करोड़ की संचयी समझौता राशि का भुगतान पूरा किया था, जिसमें 714.74 करोड़ रुपये का अंतिम भुगतान शामिल था।
एनएसई के लिए यह मंजूरी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। एक्सचेंज की लिस्टिंग योजनाएं लगभग दस साल से अटकी थीं। को-लोकेशन विवाद जैसी नियामक चुनौतियां इसकी एक बड़ी वजह थीं। सेबी की हरी झंडी मिलने से अब एनएसई को बाजार में सूचीबद्ध होने का मौका मिलेगा। यह भारतीय पूंजी बाजार के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। यह पारदर्शिता और निवेशकों के विश्वास को बढ़ाएगा।