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मनोरंजन

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई ने किसे कहा 'मुसलमानों का असली दुश्मन'

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई ने कहा है कि 'अमेरिका और इसराइल के शासक मुस्लिम समुदाय के दुश्मन' हैं.
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई ने किसे कहा 'मुसलमानों का असली दुश्मन' हिंदीबात विशेष
तस्वीर: हिंदीबात संपादकीय डेस्क (प्रतीकात्मक संदर्भ)

विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: साइन इनBBC News, हिंदीसामग्री को स्किप करेंहोम पेजदेखिएसुनिएमेरी ख़बरेंसेक्शनहोम पेजभारतविदेशहेल्थमनोरंजनकरियरफ़ाइनेंसखेलविज्ञान-टेक्नॉलॉजीसोशलभारतविदेशहेल्थमनोरंजनकरियरफ़ाइनेंसखेलविज्ञान-टेक्नॉलॉजीसोशललाइव, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई ने किसे कहा 'मुसलमानों का असली दुश्मन'ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई ने कहा है कि 'अमेरिका और इसराइल के शासक मुस्लिम समुदाय के दुश्मन' हैं.

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🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु

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💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई ने कहा है कि अमेरिका और इसराइल के शासक मुस्लिम समुदाय के दुश्मन हैं.

‘यूनिटी वीक’ के मौक़े पर जारी अपने संदेश में मोजतबा ने पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ़्रीका के मुस्लिम देशों के शासकों से अपने ‘वास्तविक दुश्मन’ को पहचानने और उसके ख़िलाफ़ खड़े होने की अपील की.

संदेश में कहा गया है, "अमेरिका और इसराइल के शासक केवल ईरानी शासन, जनता और ग्रेट इस्लामिक रेज़िस्टेंस फ़्रंट के दुश्मन नहीं हैं, बल्कि वे पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ़्रीका समेत पूरे मुस्लिम जगत के भी दुश्मन हैं. संदेश में यह भी कहा गया है कि इस मामले में उन देशों के शासक भी अपवाद नहीं हैं, जिनमें से कई को अमेरिका और इसराइल का सहयोगी माना जाता है."

मोजतबा ख़ामेनेई ने पश्चिम एशिया और फ़ारस की खाड़ी के देशों समेत इस्लामिक देशों के शासकों को ‘अपने वास्तविक दुश्मन को पहचानने, उसकी योजना को समझने और उसका मुक़ाबला करने’ की सलाह दी.

उन्होंने अपने संदेश में कहा, "कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी पद पर हो, अगर वह जानबूझकर या अनजाने में ऐसा कोई क़दम उठाता है जिससे मुसलमानों के बीच विभाजन पैदा हो या मुस्लिम समुदाय में टकराव बढ़े, तो वह इस्लाम के दुश्मनों के मक़सद को पूरा करता है."

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बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने कहा है कि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतनराम मांझी को आरक्षित सीटों से इस्तीफ़ा देकर सामान्य सीटों से चुनाव लड़ना चाहिए.

तेजस्वी यादव ने आरक्षण के मुद्दे पर मीडिया से बातचीत में कहा, "एक बात समझने की ज़रूरत है कि अभी तक आरक्षण को ख़त्म करने वाला कोई पैदा नहीं हुआ है. आप जानते हैं कि तेजस्वी ने आज तक न तो आरक्षण का इस्तेमाल किया और न ही फ़ायदा उठाया. लेकिन चाहे जीतनराम मांझी हों या चिराग पासवान, वे आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ते रहे हैं और इस तरह की बातें कर रहे हैं."

उन्होंने कहा, "जो आरक्षण को ख़त्म करना चाहते हैं, उन्हीं के साथ जीतनराम मांझी, चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और नीतीश कुमार की पार्टी खड़ी है."

तेजस्वी ने कहा, "आरएसएस और बीजेपी हमेशा से आरक्षण के ख़िलाफ़ रहे हैं. इन लोगों में दम है तो आरक्षित सीटों से इस्तीफ़ा देकर सामान्य सीटों से चुनाव लड़ना चाहिए. ये आरक्षण का फ़ायदा उठाकर सरकार में मंत्री हैं और बाद में बहस भी कर रहे हैं. ये लोग अपने समाज के लिए नहीं बल्कि कुर्सी के लिए हैं."

गौरतलब है कि आरक्षण को हटाने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन चल रहा है. हाल ही में केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता जेपी नड्डा ने प्रदर्शनकारियों से मुलाक़ात भी की थी.

उत्तरी साइप्रस में रविवार को एक पैसेंजर नाव के पलटने से सात लोगों की मौत हो गई. हादसे के बाद 23 लोग अब भी लापता हैं, जबकि 237 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है. कुछ यात्रियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है.

स्वघोषित तुर्की गणराज्य उत्तरी साइप्रस के प्रधानमंत्री उनाल उस्तेल ने सोशल मीडिया पर एक अपडेट में हादसे की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि राहत और बचाव अभियान जारी है.

तुर्की के गृह मंत्रालय के मुताबिक़, हादसे के वक़्त नाव में 259 यात्री और चालक दल के आठ सदस्य सवार थे. नाव काइरेनिया पोर्ट से क़रीब चार समुद्री मील दूर समंदर में पलट गई.

समुद्री यातायात की निगरानी करने वाली मरीन ट्रैफ़िक सर्विस के मुताबिक़, नाव रविवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 11:58 बजे उत्तरी साइप्रस के बंदरगाह से रवाना हुई थी.

हादसे के बाद सामने आई तस्वीरों में दर्जनों लोग लाइफ़ जैकेट पहने एक अन्य नाव से बंदरगाह पहुंचते दिखाई दे रहे हैं. कुछ तस्वीरों में कई लोग समुद्र में पलटी हुई नाव के ऊपर खड़े नज़र आ रहे हैं.

फ़िलहाल नाव में सवार लोगों की नागरिकता की जानकारी सामने नहीं आई है. बचाए गए यात्रियों में से घायलों की हालत कितनी गंभीर है, यह भी अभी स्पष्ट नहीं है.

गौरतलब है कि उत्तरी साइप्रस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त देश नहीं है. यह क्षेत्र 1974 में तुर्की के सैन्य हस्तक्षेप के बाद से तुर्की के नियंत्रण में है.

नेपाल के नुवाकोट ज़िले में बाढ़ से तबाह हुए एक स्कूल के हेड टीचर ने समय रहते क़रीब 900 छात्र-छात्राओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया.

हेड टीचर राजेंद्र दवाड़ी के मुताबिक़, उन्हें बाढ़ के ख़तरे को लेकर कुछ ही मिनटों के भीतर अलग-अलग लोगों से चार फ़ोन कॉल आए थे. इन चेतावनियों के बाद उन्होंने बिना देर किए स्कूल ख़ाली कराने का फ़ैसला किया.

राजेंद्र दवाड़ी नुवाकोट स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के हेड टीचर हैं. स्कूल में कुल 1,600 से अधिक स्टूडेंट पढ़ते हैं. दवाड़ी ने बताया कि उन्हें लगातार फ़ोन पर इलाक़े में बाढ़ आने के ख़तरे की जानकारी दी गई. कुछ कॉल में यह भी बताया गया कि ऊपरी इलाक़े में स्थित बेत्रावती बस्ती में बाढ़ का पानी पहले ही तबाही मचा चुका है.

दवाड़ी ने बताया कि इन चेतावनियों के बाद उन्होंने छात्र-छात्राओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाने का फ़ैसला किया.

उन्होंने कहा, "मैंने तय किया कि अब और देरी नहीं करनी चाहिए. अगर बाढ़ नहीं भी आती, तो बच्चों की एक दिन की पढ़ाई का ही नुक़सान होता."

बच्चों को ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थान की ओर ले जाते समय दवाड़ी ने देखा कि नदी से क़रीब 100 मीटर दूर स्थित स्कूल का हॉस्टल बाढ़ के पानी में डूब रहा था.

उन्होंने कहा कि अगर छात्र-छात्राओं को निकालने के फ़ैसले में 10 मिनट और देरी होती, तो हालात बेहद भयावह हो सकते थे.

गोरखपुर से बीजेपी सांसद और अभिनेता रवि किशन का एक बयान सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने गोरखपुर की तुलना स्पेन से की है.

उन्होंने शनिवार को बशारतपुर में नवनिर्मित कल्याण मंडपम के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान यह बयान दिया था.

अब सांसद रवि किशन ने कहा, "विरोधी, विपक्ष, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस या इंडी गठबंधन विकास कार्यों की तारीफ़ क्यों करेगा? गोरखपुर की जनता खुश है. मैंने 2004 में गोरखपुर को देखा था और अब देख रहा हूं... मुझे गर्व है."

उन्होंने कहा, "हम मेनिफ़ेस्ट करते हैं, सपने देखते हैं और उसी तरह बनता जा रहा है. विरोधी कभी भी बीजेपी, मोदी जी और विकास कार्यों की तारीफ़ नहीं करेंगे वरना उनकी राजनीति ख़त्म हो जाएगी."

उन्होंने कहा, "मेरा काम है अपनी सरकार की बातों को बुलंदी और ताक़त से रखना."

इससे पहले रवि किशन के बयान पर समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि गोरखपुर में सड़कों पर गड्ढे हैं और वो नहरें बन गई हैं.

उन्होंने कहा, "कुछ लोगों को बनारस भी क्योटो लग रहा था, उन्हें स्पेन लग रहा है, तो इसका तो कोई इलाज नहीं है. जनता सब जान रही है, गोरखपुर की भी जनता जान रही है. वहां सड़कों पर गड्ढे हैं, नहरें बन गई हैं, सड़कों पर भी बोटिंग हो रही है."

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नेपाल में 26 अगस्त को आई फ़्लैश फ़्लड के बाद अब भी कई लोग लापता हैं. लापता लोगों में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं.

इस बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने रेस्क्यू किए गए 149 भारतीय नागरिकों की जानकारी साझा की है.

विदेश मंत्रालय ने रेस्क्यू किए गए भारतीय नागरिकों के नामों की सूची भी जारी की है.

साथ ही बताया है कि यह जानकारी 30 अगस्त, 2026 को शाम 5:30 बजे तक की है.

वहीं, न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के हवाले से बताया है कि तिब्बत में लापता 261 विदेशी नागरिकों में 49 भारतीय भी शामिल हैं.

चीनी अधिकारियों के अनुसार, लापता लोगों में नेपाल के 104, भारत के 49, लातविया के 33, अमेरिका के 18 और ब्रिटेन के 15 नागरिक शामिल हैं.

इसके अलावा कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के छह-छह, दक्षिण अफ़्रीका के चार, जबकि मलेशिया, जर्मनी और रूस के तीन-तीन नागरिक लापता बताए गए हैं.

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एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में दिए बयान पर प्रतिक्रिया दी है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को न्यूयॉर्क में एक सम्मेलन में कहा कि जो हिंदू यह मानता है कि मुसलमानों को 'भारत से बाहर निकाल देना चाहिए', वह हिंदू नहीं रह सकता.

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा कि यह आरएसएस की पुरानी चाल है, कुछ बातें दुनिया के लिए होती हैं और कुछ बातें उसके अपने सदस्यों के लिए.

ओवैसी ने एक्स पर लिखा, "आरएसएस के संस्थापक हेडगेवार की जीवनी में बताया गया है कि उन्होंने कांग्रेस से दूरी इसलिए बनाई क्योंकि गांधी जी हिंदू-मुस्लिम एकता पर काम करते थे. वहीं, गोलवलकर ने 1940 में कहा था कि आरएसएस एक झंडे, एक नेता और एक विचारधारा से प्रेरित है."

उन्होंने लिखा, "गोलवलकर की किताब बंच ऑफ़ थॉट्स में इंटरनल थ्रेट्स नाम का एक लंबा अध्याय है, जिसमें भारत के मुस्लिम और ईसाई नागरिकों को क्रमशः नंबर एक और नंबर दो का ख़तरा बताया गया है."

ओवैसी ने दावा किया,"आरएसएस की विचारधारा के तहत यूसीसी के नाम पर मुसलमानों पर हिंदू क़ानून लागू किया जा रहा है. ईसाइयों को कड़े धर्म परिवर्तन विरोधी क़ानूनों के नाम पर निशाना बनाया जा रहा है. यूएपीए जैसे क़ानूनों के गंभीर दुरुपयोग को भी नहीं भूलना चाहिए."

ओवैसी ने लिखा, "भागवत से मेरी अपील है कि वह सावरकर, हेडगेवार, गोलवलकर आदि की ज़हरीली रचनाओं के चुनिंदा अंश ही पढ़ दें. फिर लोगों को तय करने दें कि वो आरएसएस के बारे में क्या सोचते हैं."

संबंधित ख़बर: मोहन भागवत ने मुसलमानों को देश से बाहर निकालने की सोच वाले हिंदुओं पर ये कहा

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है.

तेज प्रताप यादव ने रविवार को केंद्र सरकार और बिहार सरकार से तत्काल प्रभाव से पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की अपील की है. इससे पहले उन्होंने अपनी हत्या की आशंका भी जताई थी.

तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "मेरी सुरक्षा को लेकर केंद्र एवं बिहार सरकार से गंभीर अपील. पिछले कई दिनों से मेरी सुरक्षा को लेकर लगातार गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो रही हैं. दो दिन पहले मेरे आवास के बाहर शराब के नशे में दो लोगों को पकड़ा गया, जिसके बाद सचिवालय थाना को सूचना देकर पुलिस के हवाले किया गया."

"इसके बाद संबंधित लोगों के परिजनों द्वारा मेरे आवास के बाहर इकट्ठा होकर घेराव किया जाना सुरक्षा की दृष्टि से बेहद चिंताजनक घटना है."

उन्होंने लिखा, "मेरे कार्यक्रम बिहार सहित देश के विभिन्न हिस्सों में प्रस्तावित हैं, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण मेरा आवागमन और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होना प्रभावित हो रहा है. लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए मेरी सुरक्षा को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए."

तेज प्रताप ने लिखा, "मैं केंद्र सरकार एवं बिहार सरकार से अपील करता हूं कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए, मेरे आवास एवं आवागमन की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाए और मुझे तत्काल पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए. किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए समय रहते आवश्यक कदम उठाना बेहद ज़रूरी है."

गौरतलब है कि तेज प्रताप यादव इन दिनों ‘भोजपुरी बवाल’ शो में नज़र आ रहे हैं. इसमें भी उन्होंने दावा किया है कि उन्हें कई धमकियां मिल चुकी हैं और 'जयचंद' उनकी हत्या करवाना चाहते हैं.

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नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के दो दिन बाद शुक्रवार को मलबे से ज़िंदा निकाली गई पांच साल की बच्ची मनीषा को उसके माता-पिता से मिला दिया गया है.

राजधानी काठमांडू के टीचिंग अस्पताल के एक अधिकारी के मुताबिक़, मनीषा की हालत स्थिर है और वह अब धीरे-धीरे स्वस्थ हो रही है.

बचावकर्मी रसुवा ज़िले के स्याफ़्रुबेसी इलाक़े में बाढ़ और भूस्खलन के बाद मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे थे. इसी दौरान उन्हें मलबे के नीचे से आवाज़ सुनाई दी. इसके बाद सुरक्षाबलों की टीम ने इलाक़े में तलाशी शुरू की और मलबा हटाने का काम शुरू किया.

नेपाल आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स के अधिकारी संजू खत्री के मुताबिक़, मलबा हटाने के दौरान बचावकर्मियों को वहां 5 वर्षीय बच्ची मनीषा मिली.

बच्ची मलबे के नीचे फंसी हुई थी. उसे बाहर निकालने में क़रीब दो घंटे का समय लगा. बचाव दल ने कड़ी मशक्कत के बाद बच्ची को ज़िंदा बाहर निकाला.

बचाव के समय मनीषा ज़िंदा थी, लेकिन उसकी हालत बेहद नाज़ुक थी और वह मुश्किल से प्रतिक्रिया दे पा रही थी. टीम ने उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए हेलिकॉप्टर बुलाया, लेकिन ख़राब मौसम के कारण तत्काल यह संभव नहीं हो सका.

इसके बाद बचावकर्मी मनीषा को आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स के रेस्क्यू कैंप ले गए. वहां उसे पानी दिया गया. कुछ देर बाद बच्ची को होश आया, जिसके बाद उसे उबले हुए चावल का पानी पिलाया गया, ताकि उसकी हालत में सुधार हो सके.

मलबे में लंबे समय तक फंसे रहने के कारण मनीषा बुरी सदमे में थी. शनिवार दोपहर उसे हेलिकॉप्टर से काठमांडू के टीचिंग अस्पताल पहुंचाया गया.

अस्पताल ने रविवार को मनीषा की हालत को लेकर अपडेट जारी किया. अस्पताल के मुताबिक़, बच्ची अब ठीक हो रही है और उसकी हालत स्थिर बनी हुई है. इसी दौरान उसे उसके माता-पिता से भी मिला दिया गया.

तिब्बत में नेपाल सीमा से लगे ग्यिरोंग पोर्ट पर 26 अगस्त को आई भीषण फ़्लैश फ़्लड के बाद 23 देशों के 261 विदेशी नागरिकों का अब तक पता नहीं चल पाया है. चीनी अधिकारियों ने रविवार को मीडिया ब्रीफ़िंग में यह जानकारी दी.

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के हवाले से बताया है कि लापता विदेशी नागरिकों में 49 भारतीय भी शामिल हैं.

चीनी अधिकारियों के अनुसार, लापता लोगों में नेपाल के 104, भारत के 49, लातविया के 33, अमेरिका के 18 और ब्रिटेन के 15 नागरिक शामिल हैं. इसके अलावा कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के छह-छह, दक्षिण अफ़्रीका के चार, जबकि मलेशिया, जर्मनी और रूस के तीन-तीन नागरिक लापता बताए गए हैं.

आयरलैंड, एस्टोनिया, फ़्रांस, नीदरलैंड्स और न्यूज़ीलैंड के दो-दो नागरिकों का भी पता नहीं चल पाया है. कज़ाकिस्तान, फ़िनलैंड, लिथुआनिया, पुर्तगाल, यूक्रेन, स्पेन और हंगरी के एक-एक नागरिक के लापता होने की जानकारी दी गई है.

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे भारतीय

दरअसल, बड़ी संख्या में भारतीय तीर्थयात्री कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तिब्बत पहुँचे थे. इनमें से कुछ तीर्थयात्री बाढ़ आने के समय तिब्बत-नेपाल सीमा पर स्थित इमिग्रेशन भवन में मौजूद थे.

बाढ़ ने तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में भारी तबाही मचाई. इस दौरान सीमा पर स्थित विशाल इमिग्रेशन भवन भी बाढ़ की चपेट में आ गया. इमिग्रेशन भवन को बाढ़ के पानी में घिरते दिखाने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को उज़्बेकिस्तान के सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘ओली दाराजली डस्टलिक’ से सम्मानित किया गया.

उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोयेव ने ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान प्रदान किया.

उज़्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने के साथ ही पीएम मोदी को विभिन्न देशों की ओर से दिए गए सर्वोच्च सम्मानों की संख्या 35 हो गई है.

इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने ताशकंद में राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक की. बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच यूरेनियम सप्लाई को लेकर भी बातचीत हुई.

पीएम मोदी ने कहा, “हम यूरेनियम की आपूर्ति के लिए भी एक रणनीति के साथ आगे बढ़ेंगे और एक व्यवस्था बनाएंगे.”

उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोयेव ने कहा, "आपके नेतृत्व में भारत सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है. आपके क़रीबी मित्र के तौर पर हम निश्चित रूप से इन सभी उपलब्धियों को देखकर बहुत ख़ुश हैं."

वहीं, रविवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी ने ताशकंद में योग फ़ेडरेशन ऑफ उज़्बेकिस्तान की ओर से आयोजित योग सेशन में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने योग किया और लोगों के साथ योग के ज़रिए स्वस्थ जीवनशैली का संदेश साझा किया.

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नेपाल और तिब्बत में आई फ़्लैश फ़्लड के बाद अब नए ख़तरे की आशंका जताई जा रही है.

बाढ़ से मलबे ने नदियों का रास्ता रोक दिया है, जिससे ऊपरी इलाक़ों में नई झीलें बन गई हैं. ऐसे में इनके अचानक टूटने से दोबारा बाढ़ आने का ख़तरा बढ़ गया है.

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ़ रीडिंग में 'अर्ली वॉर्निंग एंड डिज़ास्टर' पर शोध करने वाले विशेषज्ञ जेफ़ दा कोस्टा ने बताया कि दूसरी बाढ़ का पहली बाढ़ जितना बड़ा होना ज़रूरी नहीं है, फिर भी वह गंभीर नुक़सान पहुंचा सकती है.

उन्होंने कहा, "अब यह देखना बहुत ज़रूरी है कि इलाक़े में बनी झीलों और नदियों के रास्ते में जमा मलबे में क्या बदलाव हो रहे हैं और वे कहां टूट सकते हैं."

विशेषज्ञ ने नेपाल और चीन के बीच निगरानी से जुड़ी सूचनाओं को साझा करने पर भी ज़ोर दिया.

उन्होंने कहा कि ऊपरी इलाक़ों में होने वाली घटनाओं का असर सीमा पार रहने वाले लोगों पर बहुत तेज़ी से पड़ सकता है. ऐसे में सूचनाओं का आदान-प्रदान भी तेज़ी से होना चाहिए, ताकि ज़मीन पर समय रहते ज़रूरी फ़ैसले लिए जा सकें.

दा कोस्टा ने इस आपदा के संदर्भ में जलवायु परिवर्तन को भी महत्वपूर्ण बताया. उनके अनुसार, बढ़ते तापमान के कारण हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर, पर्माफ़्रॉस्ट और पहाड़ी ढलानों की स्थिरता में बदलाव हो रहा है.

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना गहन विश्लेषण के मौजूदा आपदा को सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन का परिणाम नहीं माना जा सकता.

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- रिज़र्वेशन हटाओ आंदोलन: क्या यह मुद्दा बीजेपी के गले की फाँस बन रहा है?

- इमरान ख़ान को लेकर क्या पाकिस्तान पर बढ़ रहा है अंतरराष्ट्रीय दबाव?

- मोहन भागवत ने मुसलमानों को देश से बाहर निकालने की सोच वाले हिंदुओं पर ये कहा

- नेपाल: बाढ़ को लेकर इतनी अलग-अलग ख़बरें क्यों आ रही हैं और सच क्या है?

रविवार को आयोजित नीट-पीजी 2026 परीक्षा के दौरान जयपुर के सीतापुरा स्थित आईओएन डिजिटल ज़ोन आईडीज़ी सेंटर नंबर 41682 और 41683 पर परीक्षा पूरी नहीं कर पाने वाले अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी.

नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) ने नोटिस जारी कर इसकी जानकारी दी.

एनबीईएमएस ने बताया कि 30 अगस्त को हुई नीट-पीजी परीक्षा में देशभर के 1111 केंद्रों पर 2,65,980 अभ्यर्थी शामिल हुए, जिनमें से करीब 2,63,535 अभ्यर्थियों की परीक्षा पूरी हो गई.

एनबीईएमएस ने बताया कि जयपुर के दो केंद्रों पर आंतरिक बिजली व्यवस्था में खराबी के कारण कुछ अभ्यर्थी परीक्षा पूरी नहीं कर सके.

एनबीईएमएस ने इसके लिए अभ्यर्थियों को हुई असुविधा पर खेद जताया है.

प्रभावित अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा पांच सितंबर 2026 को दोपहर 3 बजे जयपुर में आयोजित की जाएगी.

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता को लेकर दिए बयान पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज़ हुसैन ने प्रतिक्रिया दी है.

उन्होंने कहा, "संघ प्रमुख ने बहुत महत्वपूर्ण बात कही है. कुछ संकीर्ण सोच वाले लोग मानते हैं कि भारत मुसलमानों के बिना चल सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है."

शाहनवाज़ हुसैन ने कहा, "हिंदू और मुसलमान हमेशा से साथ रहते आए हैं. न तो संघ और न ही बीजेपी ने कभी ऐसा सोचा है कि दोनों साथ नहीं रह सकते."

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर काफी ग़लत और दुर्भावनापूर्ण प्रचार किया जाता है.

उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख के बयान से जो संदेश गया है, उसका दुनिया भर में सकारात्मक असर पड़ा है.

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को न्यूयॉर्क में एक सम्मेलन में कहा कि जो हिंदू यह मानता है कि मुसलमानों को भारत से ''बाहर निकाल देना चाहिए", वह हिंदू नहीं रह सकता.

विपक्षी नेताओं ने मोहन भागवत के बयान पर निशाना साधा है और इस पर अमल करने की बता कही है.

तिब्बत चीन के सबसे ज़्यादा कड़े नियंत्रण वाले इलाक़ों में से एक है. चीन ने 1950 के दशक में तिब्बत पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था.

तिब्बत लंबे समय से ज़्यादा स्वायत्तता की मांग करता रहा है और चीन यहां विरोध प्रदर्शन या किसी भी तरह की अस्थिरता को लेकर बेहद सतर्क रहता है.

इसी वजह से इस आपदा के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद राहत कार्यों को लेकर निर्देश दिए हैं.

प्रधानमंत्री ली चियांग भी गुरुवार को घटनास्थल पर पहुंचे. किसी बड़ी आपदा के बाद इतनी जल्दी उनका प्रभावित इलाके का दौरा करना काफी असामान्य माना जा रहा है.

तिब्बत में प्रवेश करना आसान नहीं है. विदेशियों को वहां जाने के लिए विशेष वीज़ा और परमिट की ज़रूरत होती है. विदेशी मीडिया के लिए भी तिब्बत में पहुंचना बेहद मुश्किल है. वहां मौजूद लोगों से संपर्क करना भी आसान नहीं है.

यही वजह है कि तिब्बत में इस समय वास्तव में कितनी बड़ी तबाही हुई है, इसका सही अंदाज़ा लगाना मुश्किल है.

हमें वहां की स्थिति जानने के लिए काफी हद तक चीन के सरकारी मीडिया की रिपोर्टों पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

नेपाल से तिब्बत होते हुए पवित्र कैलाश पर्वत की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को भी चार अलग-अलग परमिट लेने पड़ते हैं. इनमें चीनी सेना से मिलने वाली विशेष अनुमति भी शामिल है.

चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी के मुताबिक़, शनिवार शाम 6 बजे तक तिब्बत में मडस्लाइड की वजह से 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 546 लोग लापता हैं. इनमें 226 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं.

स्विट्ज़रलैंड के उत्तरी हिस्से में रविवार तड़के एक कार्यक्रम के दौरान गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई और पांच लोग घायल हो गए.

आरगाउ कैंटोनल पुलिस ने बयान में कहा कि गोली चलाने वाले अज्ञात अभियुक्त की तलाश जारी है.

पुलिस के मुताबिक, गोलीबारी के पीछे की वजह और घटना की पूरी परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हैं.

पुलिस ने स्विस मीडिया को बताया कि गोलीबारी आगाउ के शाचेन इलाके में एक मैदान के पास हुई, जो ज़्यूरिख़ से करीब 46 किलोमीटर पश्चिम में है.

स्थानीय मीडिया के मुताबिक, इलाके में रविवार तड़के तक रेव पार्टी चल रही थी.

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में दिए हिंदू-मुस्लिम एकता और विविधता वाले बयान पर सवाल उठाए.

भागवत ने अमेरिका में शनिवार को कहा कि भारत की पहचान ‘विविधता में एकता’ से है और अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता.

अल्वी ने कहा, "पहली बात, अमेरिका जाकर ये बोलने की ज़रूरत क्यों पड़ रही है? अगर भारत में हिंदू-मुसलमानों के बीच ऐसी कोई समस्या ही नहीं है, तो अचानक अमेरिका जाकर यह कहने की ज़रूरत क्यों पड़ी?"

उन्होंने आगे कहा, "इसका मतलब है कि समस्या है. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत अपनी छवि सुधारने के लिए दिखावा कर रहे हैं. क्या उन्हें नहीं पता कि असम के मुख्यमंत्री मुसलमानों के बारे में क्या बोलते हैं? क्या उन्हें नहीं पता कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुसलमानों के बारे में क्या कहते हैं?.

राशिद अल्वी ने कहा कि अगर अमेरिका जाकर सच नहीं बोला जाएगा, तो दुनिया इस तरह के बयानों पर भरोसा नहीं करेगी.

उन्होंने कहा, “इससे छवि और खराब होगी. भारत के अंदर जो हो रहा है, उसे पूरी दुनिया जानती है."

इमेज स्रोत, Sanchit Khanna/Hindustan Times via Getty Images

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने अमेरिका में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के ‘विविधता में एकता’ वाले बयान पर निशाना साधा है.

सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “भागवत न्यूयॉर्क में कहते हैं, 'विविधता हमारी मूल एकता की खूबसूरती है और इसे बचाकर रखना चाहिए', विदेश में समझदारी की बातें, लेकिन देश में ख़ामोशी."

उन्होंने कहा कि सिर्फ़ शब्द मायने नहीं रखते, उस पर अमल भी होना चाहिए.

सिब्बल की यह प्रतिक्रिया भागवत के न्यूयॉर्क में दिए उस भाषण के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘विविधता में एकता’ भारत के डीएनए में है और इसका सम्मान करना चाहिए और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए.

शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इंफोसिस थिएटर में आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय और अलग-अलग धर्मों के नेताओं को संबोधित किया.

भागवत ने कहा कि अमेरिका की बात होती है तो अक्सर बहुलवाद की चर्चा होती है, जबकि भारत के संदर्भ में ‘विविधता में एकता’ की बात की जाती है.

उन्होंने कहा कि एकता और विविधता, दोनों भारत के डीएनए का हिस्सा हैं. स्वामी विवेकानंद का ज़िक्र करते हुए भागवत ने कहा कि हर देश का अपना एक उद्देश्य और भविष्य होता है.

भागवत ने कहा, "भारत का उद्देश्य विविधता में एकता को महसूस करना और समय-समय पर दुनिया को भी इसका एहसास कराना है. हम एक हैं और हमारी विविधता उस एकता को और खूबसूरत बनाती है."

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता को लेकर दिए गए बयान पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद राशिद फिरंगी महली ने प्रतिक्रिया दी है.

उन्होंने कहा, “मोहन भागवत ने जो कहा है, मेरी राय में उसे देश में ज़मीनी स्तर पर लागू भी किया जाना चाहिए. तभी इस तरह के बयान को सकारात्मक कहा जा सकता है."

उन्होंने कहा कि भागवत के बयान से एक सकारात्मक संदेश ज़रूर गया है.

खालिद राशिद ने कहा, "यह सच्चाई है कि बड़ी संख्या में लोग अपने निजी हितों की वजह से राजनीति कर रहे हैं. लेकिन अगर सत्ता में बैठे लोग जनता की समस्याओं को हल करने का काम करें, तो राजनीति एक बहुत बड़ी सामाजिक सेवा बन सकती है."

उन्होंने आगे कहा कि हक़ीक़त यह है कि ज़्यादातर नेता आम लोगों और देश के हित में काम करने के बजाय अपने निजी स्वार्थों को प्राथमिकता दे रहे हैं.

दरअसल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को न्यूयॉर्क में एक सम्मेलन में कहा कि जो हिंदू यह मानता है कि मुसलमानों को भारत से ''बाहर निकाल देना चाहिए", वह हिंदू नहीं रह सकता.

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