विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम उत्तराखंड देहरादून अल्मोड़ा उत्तर काशी ऊधम सिंह नगर ऋषिकेश कोटद्वार More •••
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
उत्तराखंड में मानसून के समय प्राकृतिक आपदाओं की संख्या बढ़ जाती है। पिछले वर्ष धराली जैसी आपदाओं में जानमाल का भारी नुकसान हुआ। वहीं, अब नेपाल की त्रासदी ने भी सभी को झकझोरा हुआ है। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के निदेशक विनीत गहलोत से प्राकृतिक आपदाओं की घटनाओं के कारणों के जानने, हिमनद झीलों के विस्फोट जोखिम समेत अन्य विषयों को लेकर अमर उजाला संवाददाता विजेंद्र श्रीवास्तव ने बातचीत की।
जवाब- उत्तराखंड का इलाका भूकंप को लेकर बहुत संवेदनशील है। करीब 600 साल से बड़ा कोई भूकंप नहीं आया है, ऐसे में अगर बहुत अधिक संवेदनशील इलाके की बात करें तो वह कुमाऊं का इलाका है। आईआईटी रुड़की ने राज्य में 250 अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए हैं। इन्हें लेकर उन्होंने भूदेव एप विकसित किया है। भूकंप रेयर होता है, पर यह बहुत नुकसान करता है। भूकंप कब आएगा, उसका पता नहीं चलता। पर अगर वह आता है तो उसके प्रभाव को कम किया जा सके, इस पर भी फोकस बढ़ाया गया है। भूकंप के प्रभाव से निपटने को लेकर लोगों को और अधिक जागरूक करना होगा।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
जवाब- हर व्यक्ति हर चीज में विशेषज्ञ नहीं हो सकता है। ऐसे में मिलकर कार्य करने की जरूरत है। अगर हिमनद झील विस्फोट के जोखिम की बात करें तो इस दिशा में समन्वय देखने को मिल रहा है। वाडिया, एनआईएच, सीबीआरआई जैसे संस्थान अपनी-अपनी विशेषज्ञता के आधार पर कार्य बांटने के साथ समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। यह बात सही है कि सामान्य तौर पर संस्थानों के बीच समन्वय नहीं हो पाता है पर मिलकर कार्य करने की जरूरत है।