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एक्सप्लेनर: इसरो की बड़ी सफलता, धरती पर हो रहे हर बदलाव को बताएगा ईओएस-05, ये कैसे करेगा काम और क्यों है खास?

एक्सप्लेनर: इसरो की बड़ी सफलता, धरती पर हो रहे हर बदलाव को बताएगा ईओएस-05, ये कैसे करेगा काम और क्यों है खास?
एक्सप्लेनर: इसरो की बड़ी सफलता, धरती पर हो रहे हर बदलाव को बताएगा ईओएस-05, ये कैसे करेगा काम और क्यों है खास? हिंदीबात विशेष
तस्वीर: सऊदी क्राउन प्रिंस एमबीएस, तुर्किये राष्ट्रपति एर्दोगन और पाक पीएम शहबाज शरीफ (आधिकारिक संदर्भ)

विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम देश शहर और राज्य चुनाव LIVE कारोबार मनोरंजन More •••

🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु

ईओएस-05 एक अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है। इसका मुख्य काम अंतरिक्ष से पृथ्वी की इमेजिंग करना है। इसका वजन करीब 2367 किलोग्राम है। ईओएस-05 को खासतौर पर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की इमेजिंग के लिए तैयार किया गया है। इस ऑर्बिट में पहुंचने के बाद सैटेलाइट पृथ्वी के एक बड़े क्षेत्र को बार-बार देख सकेगा। इस मिशन को एनएसआईएल ने एक रणनीतिक उपयोगकर्ता के लिए समर्पित लॉन्च के तौर पर किया है। इसके साथ भारत और दूसरे देशों के उपयोगकर्ताओं के 18 सह-यात्री सैटेलाइट भी भेजे गए हैं।

ईओएस-05 क्यों है खास? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स जीएसएलवी-एफ17 क्या है? जीएसएलवी-एफ17 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल यानी जीएसएलवी की 19वीं उड़ान है। इसकी लंबाई करीब 51.7 मीटर और लिफ्ट-ऑफ मास करीब 420.5 टन है। इसे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के सेकंड लॉन्च पैड से लॉन्च किया गया। रॉकेट के ऊपर 4 मीटर व्यास वाली ओगिव कंपोजिट पेलोड फेयरिंग लगी है, जिसके अंदर ईओएस-05 को रखा गया था।

💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट

जीएसएलवी-एफ17 में तीन मुख्य स्टेज हैं। पहला स्टेज यानी जीएस-1 में एस-139 और चार एल-40एच शामिल हैं। लॉन्च के समय इनके इग्निशन से थ्रस्ट पैदा होता है और रॉकेट तेजी से ऊपर बढ़ता है। पहले स्टेज का काम पूरा होने के बाद जीएस-1 सेपरेशन होता है। इसके बाद दूसरा स्टेज यानी जीएस-2 सक्रिय होता है। इसमें जीएल-40एचटी का इस्तेमाल किया गया। दूसरे स्टेज के अलग होने के बाद तीसरा स्टेज यानी जीएस-3 सक्रिय हुआ। इसे सीयूएस-15 कहा जाता है। इसमें तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन का इस्तेमाल होता है। तीसरे स्टेज का काम पूरा होने के बाद ईओएस-05 को निर्धारित सब-जीटीओ में स्थापित किया गया।

जीएसएलवी-एफ17 से अलग होने के बाद ईओएस-05 का काम खत्म नहीं होता। सैटेलाइट अपने अंदर मौजूद प्रोपल्शन सिस्टम के इंजन को कई बार चलाएगा। इससे उसकी गति और ऑर्बिट में बदलाव होगा। धीरे-धीरे उसकी ऑर्बिट की ऊंचाई बढ़ेगी और उसका आकार भी बदलेगा। इस प्रक्रिया के बाद ईओएस-05 अपनी अंतिम जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट तक पहुंचेगा। इस तरह जीएसएलवी-एफ17 का काम सैटेलाइट को सब-जीटीओ तक पहुंचाना है, जबकि अंतिम ऑर्बिट तक पहुंचने का बाकी काम ईओएस-05 अपने प्रोपल्शन सिस्टम की मदद से पूरा करता है।

🔍 संपादकीय पड़ताल एवं स्रोत विवरण (Editorial Provenance & Verification)
✍️ रिपोर्टिंग: अमर उजाला ब्यूरो
🏛️ प्राथमिक स्रोत: अमर उजाला (Amar Ujala Breaking News)
🔬 सत्यापन डेस्क: हिंदीबात रिसर्च डेस्क (HindiBaat Research)
🛡️ पड़ताल स्थिति: ✅ तथ्य-परीक्षित एवं सत्यापित
मूल संदर्भ लिंक: मूल स्रोत देखें ↗
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हिंदीबात संपादकीय डेस्क

विशेष संवाददाता

डिजिटल मीडिया आचार संहिता 2021 के अनुरूप निष्पक्ष, तथ्य-आधारित और स्वतंत्र रिपोर्टिंग। प्रत्येक खबर में 5W1H विश्लेषण और पाठक-केंद्रित स्पष्टता हमारा संकल्प है।

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