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🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
सात दिन या उससे कम शेल्फ लाइफ वाले खाद्य पदार्थों पर निर्माण की तारीख लिखना जरूरी नहीं हो सकता, लेकिन समाप्ति/उपयोग की अंतिम तारीख लिखना जरूरी है। अगर किसी मिश्रित पैकेट में अलग-अलग खाद्य पदार्थ हैं तो उसकी घोषित शेल्फ लाइफ सबसे कम शेल्फ लाइफ वाले उत्पाद के आधार पर होगी।
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 27 के तहत थोक विक्रेता या वितरक अगर खाद्य पदार्थ को उसकी समाप्ति तारीख के बाद सप्लाई करता है तो उसकी जिम्मेदारी तय की गई है। अगर खाद्य पदार्थ असुरक्षित है तो धारा 59 के तहत नुकसान की गंभीरता के आधार पर सजा हो सकती है।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
कानून में नुकसान में स्थायी या अस्थायी शारीरिक क्षति को शामिल किया गया है। अगर खाद्य पदार्थ खाने से उपभोक्ता को नुकसान या मौत होती है तो धारा 65 के तहत मुआवजे का भी प्रावधान है। मौत पर कम से कम पांच लाख रुपये, गंभीर नुकसान पर तीन लाख रुपये तक और अन्य नुकसान पर एक लाख रुपये तक मुआवजा दिया जा सकता है। गंभीर चोट या मौत के मामले में लाइसेंस रद्द करने, बाजार से खाद्य पदार्थ वापस मंगाने और प्रतिष्ठान या संपत्ति जब्त करने का आदेश भी दिया जा सकता है।
भारत में अभी यह प्रस्ताव है, लेकिन कई देशों में पैकेट के सामने चेतावनी या पोषण संबंधी लेबल पहले से लागू हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कई देशों ने फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग को उपभोक्ताओं को पोषण संबंधी जानकारी समझाने और बेहतर खाद्य विकल्प चुनने में मदद करने के लिए अपनाया है।