विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम कारोबार बिज़नेस डायरी बाजार स्टार्टअप्स कॉर्पोरेट पर्सनल फाइनेंस More •••
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
इन आंकड़ों में सबसे दिलचस्प बदलाव पेट्रोल और दूसरे विकल्पों के बीच घटता अंतर है। जुलाई 2026 में सीएनजी/एलपीजी, हाइब्रिड और ईवी को एक साथ जोड़ने पर इनकी हिस्सेदारी 40.59 फीसदी हो जाती है। वहीं, पेट्रोल/एथेनॉल की हिस्सेदारी 41.68 फीसदी है। यानी दोनों के बीच अंतर सिर्फ 1.09 प्रतिशत अंक रह गया है। जुलाई 2025 में यही अंतर 13.21 प्रतिशत का था। यानी एक साल में पेट्रोल और इन तीन वैकल्पिक विकल्पों के बीच का अंतर काफी तेजी से कम हुआ है। इससे पता चलता है कि वाहन बाजार में ग्राहकों की पसंद पहले की तुलना में ज्यादा विविध हो रही है।
कैसे मिल रही टक्कर? - फोटो : Amar Ujala हाइब्रिड कैसे बना रहा जगह? वैकल्पिक विकल्पों में हाइब्रिड भी धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहा है। जुलाई 2025 में कुल वाहन रिटेल में हाइब्रिड की हिस्सेदारी 7.89 फीसदी थी, जो जुलाई 2026 में बढ़कर 8.02 फीसदी हो गई। हाइब्रिड वाहन में पेट्रोल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल होता है। इसलिए यह उन ग्राहकों के लिए एक विकल्प बनता है जो इलेक्ट्रिक तकनीक का फायदा चाहते हैं, लेकिन पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन पर निर्भर नहीं होना चाहते।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
बदलती पसंद का असर दोपहिया और तिपहिया वाहनों में भी साफ दिखाई दे रहा है। जुलाई 2026 में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 11.24 फीसदी रही, जबकि जुलाई 2025 में यह 7.65 फीसदी थी। तिपहिया बाजार में बदलाव और ज्यादा स्पष्ट है। जुलाई 2026 में इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 65.08 फीसदी रही। यानी इस श्रेणी में इलेक्ट्रिक वाहन अब बेहद मजबूत विकल्प बन चुके हैं।
क्यों बदल रही पसंद? - फोटो : Amar Ujala उपभोक्ताओं की पसंद क्यों बदल रही है? अब सवाल यह है कि आखिर ग्राहक पेट्रोल-डीजल से आगे दूसरे विकल्पों की ओर क्यों देख रहे हैं? इसके पीछे कोई एक कारण नहीं है। ईंधन की कीमत, गाड़ी का माइलेज, रोजाना चलने की दूरी, रखरखाव का खर्च, ईवी की बढ़ती उपलब्धता, चार्जिंग ढांचे का विस्तार और ई20 को लेकर बनी चिंताएं जैसे कई पहलू खरीदारी के फैसले को प्रभावित कर रहे हैं।
सीएनजी की बढ़ती मांग के साथ इसके लिए जरूरी बुनियादी ढांचा भी विकसित किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक, सीएनजी स्टेशन स्थापित करना सिटी गैस वितरण नेटवर्क के विस्तार का हिस्सा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड ने 307 भौगोलिक क्षेत्रों में सिटी गैस वितरण नेटवर्क के विकास के लिए संस्थाओं को अधिकृत किया है। ये क्षेत्र करीब 733 जिलों और 34 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को कवर करते हैं और देश के लगभग 100 फीसदी भौगोलिक क्षेत्र में फैले हैं। इसके तहत 2032 तक देशभर में 18,336 सीएनजी स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।