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🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
इस बार जरांगे की सबसे बड़ी मांग उन 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर पात्र मराठों को कुनबी प्रमाण पत्र देने की है, जिनका रिकॉर्ड सरकार की शिंदे समिति को मिला है। उनका कहना है कि इन रिकॉर्ड के आधार पर सभी पात्र लोगों को प्रमाण पत्र मिलना चाहिए। उन्हें आशंका है कि सरकार इस आंकड़े को कम करने की कोशिश कर रही है। उनकी मांगों में गजट रिकॉर्ड के आधार पर कुनबी प्रमाण पत्र जारी करना, पात्र लोगों को ओबीसी से मिलने वाले लाभ उपलब्ध कराना और मराठा आरक्षण से जुड़े अन्य फैसलों को लागू करना शामिल है। वह चाहते हैं कि प्रक्रिया केवल आश्वासन तक सीमित न रहे, बल्कि सरकारी स्तर पर स्पष्ट कार्रवाई हो।
सरकार के मुताबिक शिंदे समिति को अब तक 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड मिले हैं। सरकार ने ओबीसी रियायतों से जुड़े सरकारी आदेश 8 सितंबर को जारी करने, मंत्रालय में अलग मराठा आरक्षण कक्ष बनाने और अन्नासाहेब पाटिल आर्थिक विकास निगम के लिए 300 करोड़ रुपये देने की बात भी कही है। मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने जरांगे से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की लेकिन वे नहीं माने। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि सरकार उन मांगों पर बातचीत के लिए तैयार है जो संविधान और कानून के दायरे में हैं। उनका स्पष्ट रुख है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने वाली मांगों पर बातचीत नहीं हो सकती।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
मनोज जरांगे के मौजूदा आंदोलन का एक बड़ा हिस्सा कुनबी प्रमाण पत्र से जुड़ा है। इसका संबंध ओबीसी आरक्षण से है। जरांगे का तर्क है कि पुराने रिकॉर्ड और गजट में जिन मराठा परिवारों की पहचान कुनबी के रूप में मिलती है, उन्हें दस्तावेज और वंशावली के आधार पर कुनबी प्रमाण पत्र दिया जाए। इससे पात्र लोगों को ओबीसी श्रेणी के तहत मिलने वाले लाभ मिल सकते हैं। यही वजह है कि 58 लाख पुराने कुनबी रिकॉर्ड इस आंदोलन में महत्वपूर्ण हो गए हैं। सरकार इन्हें आगे प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल करने की बात कह रही है, जबकि जरांगे चाहते हैं कि पात्र लोगों को बिना देरी प्रमाण पत्र मिले।
अब तक क्या-क्या हुआ? - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स अब तक कितनी बार अनशन कर चुके हैं जरांगे? मनोज जरांगे पाटिल ने 2023 से 2026 के बीच 10 बार अनशन किया, जिनकी कुल अवधि करीब 76 दिन रही। मौजूदा आंदोलन उनका 11वां अनशन है। जरांगे के आठ अनशन अंतरवाली सराटी में और दो मुंबई में हुए। सबसे लंबा अनशन 17-17 दिन के दो मौकों पर रहा।
2025 का आंदोलन - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स 2025 में क्या हुआ था, जब मुंबई तक पहुंचा आंदोलन? 2025 में जरांगे ने 29 अगस्त को मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया। उनकी मुख्य मांग थी कि मराठों को कुनबी मानकर ओबीसी आरक्षण का लाभ दिया जाए और पुराने हैदराबाद व सतारा गजट के आधार पर पात्र लोगों को कुनबी प्रमाण पत्र मिले।
2025 में सरकार के लिखित प्रस्ताव के बाद अनशन खत्म हो गया था, लेकिन कुनबी प्रमाण पत्र और मराठा आरक्षण से जुड़ी सभी मांगों का समाधान नहीं हुआ। इसी को लेकर जरांगे ने फिर आंदोलन शुरू किया है।