विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम कारोबार बिज़नेस डायरी बाजार स्टार्टअप्स कॉर्पोरेट पर्सनल फाइनेंस More •••
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
भारत के शेयर बाजार के इतिहास में एक नया मील का पत्थर स्थापित होने जा रहा है। देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई), अपना बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की तैयारी में है। बाजार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, लगभग 30,000 करोड़ रुपये का यह आईपीओ आगामी 18 सितंबर को निवेश के लिए खुल सकता है। यदि यह समय सारणी सच साबित होती है, तो यह हुंडई मोटर इंडिया के साल 2024 में आए 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ बन जाएगा। यह खबर भारतीय वित्तीय बाजार और निवेशकों के लिए इस साल की सबसे बड़ी हलचल है।
बाजार से जुड़े सूत्रों के अनुसार इस प्रस्तावित सार्वजनिक निर्गम की महत्वपूर्ण तारीखें इस प्रकार रहने की उम्मीद हैं:
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
यह विशाल आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के रूप में पेश किया जा रहा है। इसके तहत ₹1 अंकित मूल्य (फेस वैल्यू) वाले लगभग 14.89 करोड़ (148.9 मिलियन) इक्विटी शेयरों की बिक्री की जाएगी। यह हिस्सेदारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की कुल चुकता इक्विटी पूंजी का करीब 6 प्रतिशत हिस्सा है। संपूर्ण निर्गम ओएफएस होने का मतलब यह है कि वर्तमान शेयरधारक ही अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। एक्सचेंज स्वयं कोई नया शेयर जारी नहीं कर रहा है, इसलिए इस आईपीओ से मिलने वाली पूरी राशि हिस्सेदारी बेचने वाले शेयरधारकों को मिलेगी और एनएसई को अपने परिचालन के लिए कोई नया फंड प्राप्त नहीं होगा।
इस महा-आईपीओ का भारतीय बाजार पर गहरा असर देखने को मिलेगा:
भारत के सबसे बड़े एक्सचेंज का सूचीबद्ध होना कॉर्पोरेट पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यद्यपि आधिकारिक तौर पर एक्सचेंज की पुष्टि आनी बाकी है, लेकिन बाजार में इस निर्गम को लेकर भारी उत्साह है। हुंडई मोटर इंडिया का रिकॉर्ड टूटना यह दर्शाता है कि भारतीय प्राथमिक बाजार अब दुनिया के सबसे बड़े सौदों को संभालने के लिए पूरी तरह परिपक्व हो चुका है। निवेशकों की निगाहें अब 15 सितंबर को होने वाली प्राइस बैंड की घोषणा पर टिकी हैं, जो इस विशाल आईपीओ के वास्तविक आकर्षण और मूल्यांकन को तय करेगी।