विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम मध्य प्रदेश ग्वालियर अनूपपुर अशोकनगर आगर मालवा इंदौर उज्जैन More •••
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
ग्वालियर के ऐतिहासिक और रियासतकालीन गोपाल मंदिर में आज जन्माष्टमी का उत्सव बेहद खास और राजसी वैभव के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर भगवान राधा-कृष्ण का शृंगार 120 करोड़ रुपए से अधिक कीमत के बेशकीमती आभूषणों से किया जाएगा। साल में चुनिंदा विशेष अवसरों पर ही श्रद्धालुओं को इन दुर्लभ आभूषणों के दर्शन का अवसर मिलता है।
सोने, चांदी, हीरे, पन्ने, मोती और अन्य कीमती रत्नों से सजे इन आभूषणों को आज सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के लॉकर से विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच बाहर निकाला जाएगा। सुबह करीब 10 बजे नगर निगम आयुक्त द्वारा गठित समिति बैंक पहुंचकर लॉकर खुलवाएगी। इसके बाद कड़ी सुरक्षा के बीच आभूषणों को गोपाल मंदिर लाया जाएगा। यहां उनकी साफ-सफाई के बाद भगवान राधा-कृष्ण का दिव्य शृंगार किया जाएगा।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
भगवान श्रीकृष्ण के शृंगार में सोने के मुकुट के साथ पुखराज, माणिक और पन्ना जैसे बेशकीमती रत्नों से जड़े आभूषण शामिल होंगे। वहीं राधारानी का करीब तीन तोला वजन का रत्नजड़ित मुकुट भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगा।
मंदिर के सबसे कीमती आभूषणों में सात लड़ियों वाला हार शामिल है, जिसमें 62 असली मोती और 55 पन्ने जड़े हुए हैं। इसकी कीमत करीब 35 करोड़ रुपए आंकी गई है। वहीं रत्नजड़ित मुकुट की कीमत करीब 25 करोड़ रुपए बताई गई है, जबकि सोने के मुकुट की कीमत लगभग 1.25 करोड़ रुपए है। पढ़ें: चित्रकूट में बाढ़ के बाद राहत कार्य तेज, घर-घर पहुंच रहे कलेक्टर और एसपी, प्रभावितों को दिलाया भरोसा
जन्माष्टमी के अवसर पर आज गोपाल मंदिर को आकर्षक लाइटिंग से सजाया जाएगा। मंदिर परिसर में भव्य फूल बंगला और रंगोली भी बनाई जाएगी। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एलईडी स्क्रीन लगाई जाएंगी, जिन पर भगवान के लाइव दर्शन कराए जाएंगे। इस बार करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मंदिर परिसर में पुलिस बल तैनात रहेगा। सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और दर्शन में किसी तरह की परेशानी न हो।
बता दें कि गोपाल मंदिर का निर्माण सिंधिया राजवंश की महारानी बैजाबाई ने वर्ष 1843 में कराया था। सफेद संगमरमर से बने इस ऐतिहासिक मंदिर में मराठा स्थापत्य के साथ यूरोपीय वास्तुकला की झलक भी दिखाई देती है। मंदिर के गर्भगृह में चांदी से मढ़े दरवाजे इसकी भव्यता को और खास बनाते हैं। आज जन्माष्टमी के अवसर पर ग्वालियर का गोपाल मंदिर एक बार फिर राजसी परंपरा, आस्था और अद्भुत वैभव का साक्षी बनेगा।