विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम पंजाब जालंधर अमृतसर चण्डीगढ़-पंजाब पटियाला More •••
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
अमेरिका में सरकारी खाद्य सहायता योजना में कथित करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में वांछित और अमेरिकी जांच एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल मंजीत सिंह बेदी को जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित अपराध और भगोड़ों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान हुई इस कार्रवाई ने उस पूरी कहानी को फिर सामने ला दिया है, जिसकी शुरुआत अमेरिका के वाशिंगटन राज्य के ताकोमा से हुई थी और जो कनाडा होते हुए पंजाब के जालंधर तक पहुंची।
मंजीत सिंह बेदी ताकोमा में ‘एशियन ग्रॉसरी स्टोर’ नाम से किराना दुकान चलाता था और अमेरिकी सरकार की ‘सप्लीमेंटल न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम’ यानी एसएनएपी योजना से जुड़े लाभार्थियों को राशन उपलब्ध करवाता था। आरोप है कि उसने जरूरतमंद लोगों के ईबीटी कार्ड से सामान की खरीदारी करने के बजाय कार्ड स्वाइप कर उन्हें नकद रकम देना शुरू कर दिया और बदले में उस रकम का 50 प्रतिशत अपने पास रखता था। अमेरिकी जांच एजेंसियों के मुताबिक मार्च 2024 से जून 2025 के बीच की गई इस कथित धोखाधड़ी से अमेरिकी सरकार को कम से कम 6 लाख डॉलर यानी करीब 5.3 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
मामला सामने आने के बाद बेदी के खिलाफ वायर फ्रॉड और एसएनएपी लाभ धोखाधड़ी के आरोपों में कार्रवाई शुरू हुई। अदालत ने उसे तत्काल गिरफ्तार करने के बजाय कुछ शर्तों के साथ पेश होने की अनुमति दी थी। उसे अपना पासपोर्ट जमा करने और वाशिंगटन राज्य में ही रहने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आरोप है कि उसने इन शर्तों को तोड़ते हुए सड़क मार्ग से अमेरिका-कनाडा सीमा पार की और कनाडा पहुंच गया। इसके बाद वह वहां से अप्रैल 2026 में भारत आ गया।
अमेरिकी अदालत की शर्तों का उल्लंघन करने के बाद ताकोमा स्थित अमेरिकी जिला अदालत, पश्चिमी जिला वाशिंगटन, ने 21 मई 2026 को उसके खिलाफ संघीय गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। अमेरिकी एजेंसियों की तलाश के बीच बेदी ने पंजाब में अपनी पहचान छिपाकर रहने की कोशिश की, लेकिन पंजाब पुलिस की खुफिया टीमों ने उसकी गतिविधियों और नेटवर्क को ट्रेस कर लिया। इसके बाद जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने सटीक कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब अमेरिकी एजेंसियों और संबंधित विभागों से संपर्क कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके साथ ही उसके अमेरिका प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है। अमेरिका में कथित 5.3 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से शुरू हुई यह कहानी पहले कनाडा और फिर भारत तक पहुंची, लेकिन करीब हजारों किलोमीटर का फासला तय करने के बावजूद मंजीत सिंह बेदी आखिरकार जालंधर में कानून की पकड़ में आ गया।