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🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
भारतीय ओवरसीज कांग्रेस के चेयरमैन सैम पित्रोदा ने अमेरिका में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया कार्यक्रम और उनके 'मानवता की एकता' वाले बयान पर सवाल उठाए हैं। पित्रोदा ने कहा कि केवल बयान देने से बात नहीं बनती, बल्कि किसी विचार की असली परीक्षा उसके अमल में होती है।
मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित 'वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी' कार्यक्रम में कहा था कि अलग-अलग धर्म भले ही अलग रास्तों पर चलते हों, लेकिन मानवता और सत्य एक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर इंसान की गरिमा समान है। भागवत के इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पित्रोदा ने कहा कि भारत में मुस्लिम, ईसाई, यहूदी और बौद्ध समुदाय के लोगों से पूछा जाना चाहिए कि वे मौजूदा हालात को किस तरह देखते हैं। पित्रोदा ने कहा कि एक तरफ सभी का सम्मान करने की बात कही जाती है और दूसरी तरफ किसी के साथ मारपीट की घटनाएं होती हैं। उनके मुताबिक, ‘बातों से ज्यादा काम मायने रखता है।’
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत अपने संगठन के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क अभियान के तहत अमेरिका पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय प्रवासियों, भारतीय-अमेरिकी कारोबारियों और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। न्यूयॉर्क में उनके कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विरोध भी देखने को मिला। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने भागवत की यात्रा का विरोध किया था। कुछ नगर परिषद सदस्यों ने भी कार्यक्रम स्थल पर आयोजन रद्द करने की मांग की थी।
पित्रोदा ने आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि दुनिया को केवल सत्ता और मुनाफे पर ध्यान देने के बजाय लोगों और पर्यावरण को केंद्र में रखना चाहिए। नेपाल में आई बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में सड़क और बांध जैसी परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभावों पर सवाल उठाया और पूछा कि क्या ऐसी परियोजनाओं से पहले पर्याप्त पर्यावरणीय अध्ययन किए गए हैं।