- ख़ानाबदोश ज़िंदगी: क्रिमिनल ट्राइब्स का 'कलंक' हटे 74 साल हुए पर इज़्ज़त के लिए जंग अब भी जारी
- ब्रिटिश शासन भारत में एक स्थायी गांव, ज़मीन, स्थायी पता और देश में आजीविका को 'सभ्य' जीवन का पैमाना मानता था. इसी पृष्ठभूमि में 1871 में ‘क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट’ बनाया गया और कुछ समुदायों को सामूहिक रूप से अपराध से जोड़ दिया गया.।
नई दिल्ली: ब्रिटिश शासन भारत में एक स्थायी गांव, ज़मीन, स्थायी पता और देश में आजीविका को 'सभ्य' जीवन का पैमाना मानता था. इसी पृष्ठभूमि में 1871 में ‘क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट’ बनाया गया और कुछ समुदायों को सामूहिक रूप से अपराध से जोड़ दिया गया.
🔍 क्या है पूरा मामला? जानिए मुख्य घटनाक्रम
ब्रिटिश शासन भारत में एक स्थायी गांव, ज़मीन, स्थायी पता और देश में आजीविका को 'सभ्य' जीवन का पैमाना मानता था. इसी पृष्ठभूमि में 1871 में ‘क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट’ बनाया गया और कुछ समुदायों को सामूहिक रूप से अपराध से जोड़ दिया गया. इस घटनाक्रम पर संबंधित पक्षों, आधिकारिक संस्थाओं और जानकारों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
💡 इसका क्या असर होगा और आगे क्या?
इस मामले पर आने वाले दिनों में नए तथ्य और आधिकारिक निर्णय सामने आ सकते हैं। हिंदीबात की संपादकीय टीम इस विषय से जुड़ी प्रत्येक प्रामाणिक जानकारी पर नजर बनाए हुए है।