विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम दिल्ली दिल्ली-एनसीआर गाजियाबाद गुरुग्राम नूंह नोएडा फरीदाबाद
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली की 4 अगस्त की उड़ान में तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम फेल के बाद सभी यात्रियों के नौ सेकंड खौफनाक रहे। यह किसी भी यात्री या चालक दल के लिए बुरे सपने से कम नहीं थे।
एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, पायलटों ने विमान पर नियंत्रण पा लिया, लेकिन सीट बेल्ट का साइन बंद होने के कारण केबिन के भीतर मौजूद यात्रियों और क्रू सदस्यों के लिए यह झटका विनाशकारी साबित हुआ। विमान के अचानक ऊपर जाने और नीचे गिरने के दौरान लोग हवा में उछलकर सीधे छत और सामान रखने वाले खानों से जा टकराए। केबिन के भीतर मलबे और टूटी हुई प्लास्टिक का ढेर लग गया। यहां तक कि कमोड भी उखड़ गए।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
उड़ान का शुरुआती हिस्सा पूरी तरह सामान्य था। भारतीय समयानुसार सुबह करीब 9:10 बजे विमान ने कोलकाता फ्लाइट इंफॉर्मेशन रीजन में प्रवेश किया। कोलकाता एटीसी ने विमान को 34,000 फीट की ऊंचाई से बढ़ाकर 36,000 फीट पर जाने का निर्देश दिया। विमान सुरक्षित रूप से 36,000 फीट पर पहुंच गया और क्रूजिंग मोड में था।
सीट बेल्ट के साइन बंद थे और यात्री अपनी सीटों पर आराम कर रहे थे। तभी कॉकपिट पर चेतावनी प्रणालियां सक्रिय हो गईं और विमान हिचकोले खाने लगा। सह-पायलट ने स्थिति संभालने की कोशिश की, जिसके बाद पायलट-इन-कमांड ने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। तकनीकी गड़बड़ी के कारण विमान निर्धारित ऊंचाई से पहले 372 फीट ऊपर चढ़ गया और फिर झटके से 292 फीट नीचे गिरा।
करीब नौ सेकंड बाद पहले ब्लू और कुछ ही सेकंड बाद येलो और ग्रीन सिस्टम भी सक्रिय हो गए। नियंत्रण सतहों के फिर से चालू होने के बाद विमान को दोबारा स्थिर किया जा सका और विमान सामान्य स्थिति में लौट आया।