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🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में बांग्लादेश से लगे बंगाल के कई इलाकों में दुर्गा पूजा गंभीर संकट का सामना कर रही थी। उन्होंने मुर्शिदाबाद में मूर्ति बनाने वाले पिता-पुत्र हरगोबिंद दास और चंदन दास की हाल की मौत का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों को देवी काली, सरस्वती और लक्ष्मी की मूर्तियां बनाने की प्रतिभा रखने के कारण कथित तौर पर मार दिया गया। हालांकि, उनके बयान में इन मौतों को लेकर लगाए गए आरोप ही सामने रखे गए।
तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने भट्टाचार्य के बयान को बंगालियों का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि बंगालियों की अपनी परंपरा, पहचान और स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास है। घोष ने कहा कि उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि कोई यह कहेगा कि गुप्ता और जायसवाल समुदायों के साथ खड़े नहीं होने पर बंगाली बच नहीं पाते। उनका कहना था कि बंगालियों की अपनी पहचान और विशिष्टता है।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नगर निकाय चुनाव नजदीक आने के कारण भाजपा नेता लोगों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा कि भाजपा बंगाली विरासत को तोड़ने और बांटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर का उदाहरण देते हुए कहा कि टैगोर ने बंगाल विभाजन के विरोध में सड़कों पर उतरकर लोगों को एकजुट करने की कोशिश की थी। कांग्रेस ने कहा कि ऐसे बयान कोलकाता की विरासत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती ने भट्टाचार्य की टिप्पणी को इतिहास के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि बंगाल को बांटने की कोशिश ब्रिटिश शासन के दौर में भी हुई थी और 1905 में लोगों ने उसका विरोध किया था। उनके मुताबिक, 1947 में बंगाल के विभाजन के पीछे साजिश थी। चक्रवर्ती ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उस समय कांग्रेस नेतृत्व के एक बड़े हिस्से ने सत्ता के बंटवारे का समर्थन जारी रखा था। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी और हिंदू महासभा की भूमिका को भी इस संदर्भ में अलग तरीके से पेश किया।