विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम दिल्ली-एनसीआर नोएडा गाजियाबाद गुरुग्राम नूंह फरीदाबाद
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
कुछ इमारतों में आरसीसी पिलर तक नहीं इन इमारतों की स्थिति ऐसी है कि कई जगह दीवारों पर दरारें और सीलन दिखाई दे रही हैं। प्लास्टर उखड़ चुका है और पुरानी ईंटें बाहर नजर आ रही हैं। लोगों का आरोप है कि कुछ इमारतों में आरसीसी पिलर तक नहीं हैं। वहीं, इमारतों तक पहुंचने वाली गलियां बेहद संकरी हैं। आपात स्थिति में एंबुलेंस और दमकल की गाड़ियों के पहुंचने में भी परेशानी हो सकती है। ऐसे में लोगों को पैदल या कंधे पर उठाकर बाहर निकालने की स्थिति बन सकती है।
कम किराया बना मजबूरी कम किराये की वजह से लोग जर्जर भवनों में रहने का जोखिम उठा रहे हैं। इनमें मजदूरों के साथ निजी कंपनियों और फैक्टरियों में काम करने वाले कर्मचारी भी रहते हैं। लोगों का कहना है कि आसपास काम मिलने और कम किराया होने के कारण वे यहां रह रहे हैं। उनका कहना है कि किराये में बचने वाली रकम परिवार को भेजने में मदद मिलती है।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
नियमित सर्वे होता है जर्जर इमारतों का वर्क सर्किल की टीम नियमित सर्वे करती है। जहां जरूरत होती है, भवन स्वामियों को नोटिस देकर भवन तोड़ने या सुधार कराने के निर्देश दिए जाते हैं। सूरजपुर में ऐसी इमारतों का निरीक्षण कराया जाएगा। -एके सिंह, जीएम प्रोजेक्ट, ग्रेनो प्राधिकरण