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🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
कम उम्र में टाइप-1 डायबिटीज के मामले - फोटो : Freepik.com क्या हो सकती है बढ़ते मामलों की वजह? किंग्स कॉलेज लंदन की विशेषज्ञ डॉ. रोसिएरेड ब्राउनसन-स्मिथ कहती हैं, टाइप-1 डायबिटीज में हो रही यह बढ़ोतरी इतनी तेज है कि इसे केवल हमारे जीन में बदलाव से नहीं समझा जा सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे किसी एक पर्यावरणीय कारण को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। कई अलग-अलग कारक एक साथ मिलकर आनुवंशिक रूप से संवेदनशील लोगों पर अटैक कर सकते हैं। कुछ अध्ययनों में यह भी संकेत मिला है कि वायु प्रदूषण ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा बढ़ाने वाला हो सकता है।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
टाइप-1 डायबिटीज को लेकर टेंशन - फोटो : Freepik.com दुनियाभर में टाइप-1 डायबिटीज को लेकर चिंता यूरोपियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज की वार्षिक बैठक में इस रिपोर्ट को प्रस्तुत किया जाना है। अनुमान के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल टाइप-1 डायबिटीज के सामने आने वाले नए मामलों की संख्या करीब 14 प्रतिशत बढ़ सकती है। डेनमार्क के यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ऑफ सदर्न के विशेषज्ञों के मुताबिक, टाइप-1 डायबिटीज के बढ़ते मामलों की एक बड़ी वजह यह भी है कि अब लोगों में इस बीमारी की निदान भी तेजी से हो रहा है, मामले ज्यादा रिपोर्ट किए जा रहे हैं।
डॉ. ब्राउनसन-स्मिथ कहते हैं, जिन लोगों को कम उम्र में टाइप-1 डायबिटीज का पता चलता है, वे अगर इंसुलिन, ग्लूकोज मॉनिटरिंग और डायबिटीज की नियमित देखभाल कर लें तो इसके खतरे को कम किया जा सकता है। टाइप-1 डायबिटीज के इलाज में रोजाना इंसुलिन लेना जरूरी होता है। हालांकि वैज्ञानिकों ने हालिया शोध में कई कारगर वीकली इंसुलिन शॉट के बारे में जानकारी दी है, जिसमें मरीजों को रोज-रोज नहीं बल्कि हफ्ते में बस एक दिन इंजेक्शन लेने की जरूरत होती है।
डायबिटीज और इसके खतरे - फोटो : Adobe Stock गरीब देशों में खतरा ज्यादा विशेषज्ञ कहते हैं, टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ने का असर खास तौर पर गरीब देशों में ज्यादा गंभीर हो सकता है, क्योंकि वहां इंसुलिन और दूसरे जरूरी इलाज तक पहुंच सीमित है। शोध टीम ने नीति निर्माताओं से अपील की है कि वे बढ़ती मरीजों की संख्या को देखते हुए यह सुनिश्चित करें कि सभी मरीजों को जरूरी इलाज मिल सके। मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ डायबिटीज से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव बढ़ेगा।
विशेषज्ञों ने कहा है कि अगर आपको बच्चे में इस तरह की दिक्कत लगातार बनी रहती है तो समय रहते डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें। बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज का निदान सबसे ज्यादा किया जाता रहा है।
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