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🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की पुष्टि के साथ ही चीन के सरकारी और पार्टी-समर्थित मीडिया के कवरेज में दिलचस्प बदलाव दिखाई दिया। शी की भारत यात्रा की पुष्टि के बाद प्रकाशित सामग्री में सीमा विवाद कहीं गायब नजर आता है। इसकी बजाय आर्थिक सहयोग, निवेश और चीनी कंपनियों के लिए भारत में कारोबारी माहौल पर काफी जोर दिया गया है। अलग-अलग चीनी प्रकाशनों को एक साथ पढ़ने पर यह संकेत मिलता है कि चीन फिलहाल भारत के साथ अपने संबंधों को एलएसी पर तनाव से हटाकर आर्थिक सहयोग पर केंद्रित रखना चाहता है।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा से ठीक पहले, चीन ने शुक्रवार को कहा कि दोनों देशों को अपने मतभेदों को सही ढंग से सुलझाना चाहिए और अपने रिश्तों को रणनीतिक और लंबे समय के हिसाब से तय करना चाहिए। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, चीन दोनों नेताओं के निर्देशों पर अमल करने, द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और लंबे समय के नजरिये से देखने, के साथ एक-दूसरे की सफलता में मददगार के तौर पर भारत के साथ मिलकर काम करेगा।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
ब्रिक्स समिट के बारे में माओ ने कहा,यह उभरते हुए बाजारों और विकासशील देशों के बीच एकजुटता और सहयोग का अहम मंच है। चीन, मानवता के लिए एक साझा भविष्य वाला समुदाय बनाने में योगदान देने के मकसद से, ब्रिक्स सहयोग को मजबूती से आगे बढ़ाने के लिए दूसरे देशों के साथ काम कर रहा है।
इस बदले हुए सुर में चीन का अपना हित भी साफ दिखाई देता है। चीन चाहता है कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक बातचीत के बाद व्यापार और निवेश के रास्ते खुलें। यानी ब्रिक्स और वैश्विक दक्षिण उसके लिए रणनीतिक मंच हैं, जबकि व्यापार, निवेश और चीनी कंपनियों के लिए बाजार तक पहुंच तत्काल आर्थिक हित हैं। बीजिंग भारत के साथ सीमा विवाद पीछे रख कर अपने आर्थिक हितों के लिए बेहतर परिस्थितियों की मांग कर रहा है। देखना है सरकारी मीडिया का बदला सुर क्या मोदी-शी मुलाकात के बाद किसी नीतिगत बदलाव में बदलता है।