विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल के कारण पानी की भी अत्यधिक खपत हो रही है। एआई डेटा सेंटर के पर्यावरणीय प्रभाव और जल खपत को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सैम ऑल्टमैन ने चैटजीपीटी के इस्तेमाल के एवज में पानी के उपयोग संबंधी दावों पर चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने चैटजीपीटी में पानी की खपत की तुलना कैलिफोर्निया के एक बादाम को उगाने में लगने वाले पानी से की। ऑल्टमैन ने दावा किया कि 38,000 चैटजीपीटी प्रश्नों में उतना ही पानी लगता है, जितना एक बादाम उगाने में।
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जो लोग एक बार में कई बादाम खाते हैं, वे शायद ही कभी अपने जल पदचिह्न पर विचार करते हैं। हालांकि, ऑल्टमैन ने स्वीकार किया कि वह यह आंकड़ा अपनी याददाश्त से बता रहे थे और यह गलत भी हो सकता है। एआई को शक्ति प्रदान करने वाले डेटा केंद्रों की पर्यावरणीय लागत पर बढ़ती जांच के बीच ऑल्टमैन ने भारी मात्रा में पानी के इस्तेमाल की जरूरत संबंधी दावों को खारिज किया है।
एक पॉडकास्ट के दौरान ऑल्टमैन ने कहा कि लगभग 38,000 चैटजीपीटी प्रश्नों में उतना ही पानी उपयोग होता है, जितना कैलिफोर्निया के एक बादाम को उगाने में लगता है। उन्होंने उन वायरल तुलनाओं पर भी निशाना साधा, जो एक चैटजीपीटी प्रश्न को घंटों के स्नान के बराबर बताती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी तुलनाएं गहन जांच पर खरी नहीं उतरती हैं।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
ऑल्टमैन ने इससे पहले चैटजीपीटी पर एक प्रश्न पूछने की लागत लगभग 0.32 मिलीलीटर बताई थी। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे से जुड़े शोधकर्ताओं ने साल 2019 में एक अध्ययन में चौंकाने वाले अनुमान लगाए थे। इसके मुताबिक कैलिफोर्निया के एक बादाम को उगाने में औसतन 3.56 लीटर पानी लगता है। दोनों आंकड़ों पर गणना करने से पता लगा कि वास्तव में चैटजीपीटी पर 11,000 प्रश्न पूछने पर उतने ही पानी की खपत होगी, जितना एक बादाम उगाने में। यह ऑल्टमैन के बताए गए 38,000 से काफी कम है। ऐसे में अनुमान कितने ठोस हैं, या इनमें अनिश्चितता है इसका पता लगाना जटिल है।
दरअसल, एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इसके डेटा सेंटर को ठंडा रखने के काम में लगने वाले पानी की मात्रा एक ज्वलंत मुद्दा है। खासकर उन क्षेत्रों में जो पहले से ही जल संकट से जूझ रहे हैं। सर्वर को अधिक गर्म होने से बचाने के लिए आमतौर पर उपयोग की जाने वाली वाष्पीकरण शीतलन प्रणालियां भारी मात्रा में पानी खींचती हैं। कई शोधकर्ताओं ने जल-दुर्लभ क्षेत्रों पर पड़ने वाले इस दबाव को उजागर किया है। हालांकि, ओपनएआई के सीईओ ऑल्टमैन ने इस धारणा को खारिज किया है।
उन्होंने कहा, आज के डेटा सेंटर पुराने समय की अत्यधिक जल-गहन शीतलन विधियों पर निर्भर नहीं। उन्होंने दावा किया कि एक बहुत बड़े आधुनिक केंद्र पर रोजमर्रा के कामों (जैसे सिंक और टॉयलेट) में इस्तेमाल होने वाला पानी, किसी आम ऑफिस बिल्डिंग में इस्तेमाल होने वाले पानी के बराबर हो सकता है। बहरहाल, सर्वर को अधिक गर्म होने से बचाने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले 'इवैपोरेटिव कूलिंग सिस्टम' में बहुत ज्यादा पानी खर्च होने को लेकर रिसर्च में जताई गई चिंता और ऑल्टमैन के दावे दोनों चर्चा में बने हुए हैं।