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🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में जन्माष्टमी के मौके पर शुक्रवार यानी आज करीब पांच घंटे तक आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन बंद रहेंगे। मंदिर प्रशासन के अनुसार, रात करीब सात बजे से मध्यरात्रि तक सार्वजनिक दर्शन स्थगित रहेगा। इस दौरान मंदिर में भगवान जगन्नाथ से जुड़ी एक खास परंपरा के तहत श्रीकृष्ण जन्म की विशेष पूजा और अनुष्ठान किया जाएगा।
जन्माष्टमी से एक रात पहले भगवान जगन्नाथ को जेउता भोग अर्पित किया जाएगा। इसे खास औषधीय भोजन माना जाता है, जिसका संबंध प्रसव पीड़ा कम करने की परंपरा से जोड़ा जाता है। जगन्नाथ संस्कृति के शोधकर्ता डॉ. भास्कर मिश्रा के अनुसार, श्रीराम नवमी और जन्माष्टमी से एक रात पहले भगवान को यह भोग अर्पित किया जाता है। यह भोग रात में मंदिर के मुख्य द्वार बंद होने से पहले लगाया जाता है।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव के अनुसार, भगवान जगन्नाथ महाविष्णु हैं और उनके सभी अवतारों के सृजनकर्ता माने जाते हैं। उनकी मान्यता में भगवान जगन्नाथ पुरुष और स्त्री दोनों रूपों में पूजनीय हैं तथा उन्हें उस मूल शक्ति के रूप में देखा जाता है, जिससे पूरी सृष्टि का जन्म हुआ। इसी वजह से श्रीकृष्ण सहित भगवान विष्णु के अलग-अलग अवतारों के जन्म से जुड़ी परंपराएं भी जगन्नाथ मंदिर में विशेष महत्व रखती हैं।
श्रीकृष्ण जन्म से जुड़े अनुष्ठान 4 सितंबर को मंदिर में होंगे। इसके अगले दिन 5 सितंबर को नंदोत्सव मनाया जाएगा। इसके साथ ही पारंपरिक कृष्ण लीला से जुड़े अनुष्ठानों की शुरुआत होगी। इस तरह जन्माष्टमी के दौरान कुछ समय के लिए दर्शन बंद रहने के बावजूद मंदिर में धार्मिक गतिविधियां लगातार जारी रहेंगी।