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राजनीति

दुनिया के तीन ताकतवर नेताओं के बीच खड़ा ये शख्स कौन?: जानें प्रधानमंत्री से क्या कनेक्शन, अफसर की पूरी कहानी

दुनिया के तीन ताकतवर नेताओं के बीच खड़ा ये शख्स कौन?: जानें प्रधानमंत्री से क्या कनेक्शन, अफसर की पूरी कहानी
दुनिया के तीन ताकतवर नेताओं के बीच खड़ा ये शख्स कौन?: जानें प्रधानमंत्री से क्या कनेक्शन, अफसर की पूरी कहानी हिंदीबात विशेष
तस्वीर: सऊदी क्राउन प्रिंस एमबीएस, तुर्किये राष्ट्रपति एर्दोगन और पाक पीएम शहबाज शरीफ (आधिकारिक संदर्भ)

विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम देश शहर और राज्य चुनाव LIVE कारोबार मनोरंजन More •••

🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की एक तस्वीर इन दिनों चर्चा में है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हाथ पकड़े नजर आ रहे हैं। तीनों नेताओं की यह तस्वीर वायरल हुई तो कैमरे की नजर उनके पीछे खड़े एक युवा भारतीय अधिकारी पर भी गई। दुनिया के तीन बड़े नेताओं के बीच खड़े इस अधिकारी का नाम सिद्धार्थ बाबू है। वे भारतीय विदेश सेवा यानी आईएफएस के 36 वर्षीय अधिकारी हैं और इस समय विदेश मंत्रालय में अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

सिद्धार्थ बाबू 2017 बैच के आईएफएस अधिकारी हैं। वे अभी विदेश मंत्रालय के पूर्वी एशिया प्रभाग में उप सचिव के तौर पर काम कर रहे हैं। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत में मदद कर रहे थे। सिद्धार्थ बाबू चीनी भाषा जानते हैं और बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को शी जिनपिंग की बात समझने में मदद कर रहे थे। यही वजह थी कि वे इस महत्वपूर्ण बातचीत के दौरान तीनों नेताओं के पीछे खड़े दिखाई दिए।

💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट

सिद्धार्थ बाबू ने दिसंबर 2017 में नई दिल्ली में अधिकारी प्रशिक्षु के तौर पर अपना राजनयिक करियर शुरू किया। उनकी पहली विदेश पोस्टिंग चीन की राजधानी बीजिंग में हुई। 2018 से 2022 के बीच उन्होंने वहां पहले थर्ड सेक्रेटरी और फिर सेकंड सेक्रेटरी के तौर पर काम किया। बीजिंग में चार साल की इस पोस्टिंग के दौरान उन्होंने चीनी भाषा पर अपनी पकड़ मजबूत की। साथ ही चीन से जुड़े मामलों को समझने और वहां काम करने का अनुभव भी हासिल किया। आगे चलकर यही अनुभव विदेश मंत्रालय में उनकी जिम्मेदारी का अहम हिस्सा बना।

ब्रिक्स की वायरल तस्वीर में सिद्धार्थ बाबू का नजर आना पहली बार नहीं है। इससे पहले भी वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक महत्वपूर्ण बातचीत के दौरान व्याख्या करते दिखाई दे चुके हैं। जनवरी में भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान वे वीआईपी मंच पर तैनात थे। उस समय उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच हुई बातचीत की व्याख्या की थी। इससे पता चलता है कि उच्चस्तरीय बैठकों में भाषा से जुड़ी जिम्मेदारी निभाने में उनका अनुभव पहले से रहा है।

सिद्धार्थ बाबू की कहानी इंजीनियरिंग की पढ़ाई से शुरू होकर भारतीय विदेश सेवा और फिर दुनिया के बड़े नेताओं की बातचीत तक पहुंचती है। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, ई-कॉमर्स क्षेत्र में काम किया और इसके बाद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की। पहली कोशिश में सफलता नहीं मिली, लेकिन दूसरी कोशिश में 15वीं रैंक हासिल कर उन्होंने आईएफएस चुना। चीन में चार साल की पोस्टिंग, चीनी भाषा का ज्ञान और अनुवाद की पढ़ाई ने उनके अनुभव को और मजबूत किया। अब ब्रिक्स की वायरल तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी के पीछे उनकी मौजूदगी ने उन्हें चर्चा में ला दिया है।

🔍 संपादकीय पड़ताल एवं स्रोत विवरण (Editorial Provenance & Verification)
✍️ रिपोर्टिंग: अमर उजाला ब्यूरो
🏛️ प्राथमिक स्रोत: अमर उजाला (Amar Ujala Breaking News)
🔬 सत्यापन डेस्क: हिंदीबात रिसर्च डेस्क (HindiBaat Research)
🛡️ पड़ताल स्थिति: ✅ तथ्य-परीक्षित एवं सत्यापित
मूल संदर्भ लिंक: मूल स्रोत देखें ↗
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हिंदीबात संपादकीय डेस्क

विशेष संवाददाता

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