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🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव किसी खास विश्व नक्शे को मंजूरी नहीं देता। न ही यह किसी खास नक्शा बनाने की पद्धति या राष्ट्रीय सीमाओं के चित्रण को मान्यता देता है। विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या स्थानों के नाम से जुड़े राजनीतिक नक्शों पर कोई फैसला नहीं किया गया है। भारत ने साथ ही अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर रुख को स्पष्ट, लगातार एक जैसा और गैर-परक्राम्य बताया। ऐसे में भारत के अनुसार इस प्रस्ताव को जम्मू-कश्मीर के दर्जे से जोड़ना सही नहीं है।
भारत के स्पष्टीकरण के एक दिन बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने भारत के दावे को खारिज कर दिया। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति को लेकर भारत के रुख को बेबुनियाद बताया। उसने कहा कि भारत की कथित एकतरफा कार्रवाई और जम्मू-कश्मीर पर उसका नियंत्रण क्षेत्र की स्थिति को नहीं बदल सकता। पाकिस्तान ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे में लंबे समय से लंबित विवाद बताया और इस मुद्दे पर अपने पुराने रुख को दोहराया।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
पाकिस्तान के बयान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का हवाला देते हुए कहा गया कि जम्मू-कश्मीर का अंतिम फैसला वहां के लोगों की इच्छा के आधार पर होना चाहिए। पाकिस्तान ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह की अपनी पुरानी मांग भी दोहराई। उसने भारत के आधिकारिक नक्शों और जम्मू-कश्मीर पर संप्रभुता के दावे को भी खारिज किया। इस तरह पाकिस्तान ने दुनिया के नक्शे को लेकर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को फिर जम्मू-कश्मीर के पुराने विवाद से जोड़ने की कोशिश की।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया। एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन मतदान से अलग रहे। प्रस्ताव के खिलाफ केवल अमेरिका ने वोट किया। यह प्रस्ताव टोगो की ओर से पेश किया गया था और 4 सितंबर को इसे अपनाया गया। भारत के समर्थन के बाद विदेश मंत्रालय ने अपने वोट की वजह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की, ताकि यह साफ रहे कि भारत ने किसी राजनीतिक नक्शे या सीमा के मुद्दे पर अपना रुख नहीं बदला है।