- रक्षा विनिर्माण साझेदारी: तुर्किये की अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक (Bayraktar / Akinci) और एयरोस्पेस क्षमताओं के संयुक्त उत्पादन पर सहमति।
- लाल सागर समुद्री सुरक्षा: बाब-अल-मंदेब और अरब सागर में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा हेतु रियल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करने पर निर्णय।
- सऊदी विज़न 2030: सऊदी अरब के 50% घरेलू रक्षा खरीद लक्ष्य में तुर्किये और पाकिस्तान के सैन्य तकनीकी सहयोग का एकीकरण।
रियाद/मक्का: सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक 'मक्का त्रिपक्षीय रक्षा सहयोग समझौते' (Makkah Trilateral Defense Agreement) के तहत पहली उच्चस्तरीय कार्यसमिति और मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित हुई है। इस बैठक में तीनों देशों के रक्षा मंत्रियों, वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और रणनीतिक नीति निर्माताओं ने संयुक्त रक्षा उत्पादन, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के व्यापक रोडमैप पर मुहर लगाई है।
🔍 क्या है मक्का त्रिपक्षीय रक्षा समझौता? जानिए पूरा घटनाक्रम
मई 2024 में सऊदी अरब के मक्का में आयोजित प्रारंभिक त्रिपक्षीय शिखर वार्ता के बाद यह पहला औपचारिक रक्षा सत्र है। इस रणनीतिक बैठक में सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान, तुर्किये के रक्षा मंत्री यासर गुलर (Yaşar Güler) और पाकिस्तानी रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। वार्ता का मुख्य केंद्र बिंदु तीनों देशों की रक्षा क्षमताओं को एक साझा सुरक्षा फ्रेमवर्क में जोड़ना है।
🛡️ किन प्रमुख रक्षा मुद्दों और तकनीक पर बनी सहमति?
- ड्रोन व एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: तुर्किये की अग्रणी रक्षा कंपनी Baykar द्वारा सऊदी अरब में मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs) के स्थानीय निर्माण और पाकिस्तान वैमानिकी परिसर (PAC Kamra) के साथ तकनीकी समन्वय।
- समुद्री गश्त व नौसैनिक अभ्यास: लाल सागर, अदन की खाड़ी और उत्तरी अरब सागर में तेल टैंकरों व व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा हेतु तीनों नौसेनाओं का संयुक्त गश्ती तंत्र।
- संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण: आतंकवाद विरोधी अभियानों और स्पेशल फोर्सेज के लिए वार्षिक त्रिपक्षीय युद्धाभ्यास का आयोजन।
🌐 ईरान और मध्य पूर्व की भू-राजनीति पर क्या होगा असर?
कूटनीतिक हलकों में इस बैठक को लेकर चर्चा थी कि क्या यह गठबंधन किसी तीसरे देश के खिलाफ केंद्रित है। हालांकि, सऊदी और तुर्किये के राजनयिक सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि यह त्रिपक्षीय पहल किसी भी देश (विशेष रूप से ईरान) के विरुद्ध आक्रामक मोर्चा नहीं है।
चीन की मध्यस्थता में 2023 में हुए 'सऊदी-ईरान शांति समझौते' के बाद, रियाद अपनी विदेश और सुरक्षा नीति में संतुलन बनाए रखना चाहता है। तुर्किये (नाटो सदस्य), पाकिस्तान (परमाणु शक्ति संपन्न) और सऊदी अरब (आर्थिक महाशक्ति) का यह तालमेल पश्चिम एशिया में किसी एक शक्ति पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने की रणनीति का हिस्सा है।
यह बैठक दर्शाती है कि मध्य पूर्व का सुरक्षा ढांचा अब केवल पारंपरिक पश्चिमी सुरक्षा छतरी तक सीमित नहीं है। तुर्किये का स्वदेशी रक्षा उद्योग, पाकिस्तान की अनुभवी सैन्य जनशक्ति और सऊदी अरब का पूंजीगत निवेश मिलकर एक नई गैर-पश्चिमी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला स्थापित कर रहे हैं।