विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया सरकार की माई फीड, माई वे पहल के तहत अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स को उनके डिफॉल्ट फीड के बारे में विकल्प देना होगा। यूजर्स चाहें तो एल्गोरिदम की ओर से सजेस्ट किए गए पर्सनलाइज्ड कंटेंट वाला फीड चुन सकते हैं। नहीं तो उनके पास दूसरा विकल्प भी होगा, जिसमें वे एल्गोरिदम आधारित कंटेंट से हटकर केवल उन्हीं दोस्तों और क्रिएटर्स की पोस्ट देख सकेंगे, जिन्हें वे खुद फॉलो करते हैं। प्रस्ताव के तहत 16 साल से अधिक उम्र के यूजर्स को यह विकल्प देने की बात कही गई है।
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
इस फैसले पर सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया यूजर्स को अपने ऑनलाइन अनुभव पर ज्यादा कंट्रोल मिलना चाहिए। दुनियाभर में सोशल मीडिया कंपनियों के एल्गोरिदम को सवाल उठते रहें हैं। आरोप है कि कुछ एल्गोरिदम यूजर्स को ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए उनकी पंसद से ही मिलता-जुलता कंटेंट दिखाते हैं। इससे उनका समय भी बर्बाद होता है। इसलिए सरकार ऐसा प्रस्ताव लाई है। ऐसे प्रस्ताव से सोशल मीडिया एडिक्शन के जोखिम कम हो सकेंगे और यूजर्स को अपनी पसंद के मुताबिक फीड चुनने का अधिकार भी मिल सकेगा।
अगर कोई इस प्रस्तावित नियमों का पालन नहीं करता है, तो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिकतम 10.92 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। नियमों के अनुपालन और इन्हें लागू कराने की जिम्मेदारी ऑस्ट्रेलिया के इंटरनेट सेफ्टी रेगुलेटर ई-सेफ्टी कमिश्नर की होगी।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
इतना ही नहीं प्रस्तावित कानून के तहत ई-सेफ्टीको हानिकारक और अवैध ऑनलाइन सामग्री को तेजी से हटाने के लिए नोटिस जारी करने की अतिरिक्त शक्तियां भी दी जाएंगी। सरकार के मुताबिक, ई-सेफ्टी को न्यूडिफाई एप्स या वेबसाइट्स से जुड़े कंटेंट को हटाने के लिए भी नोटिस जारी करने का अधिकार मिलेगा। इसके अलावा बच्चों को साइबरबुलिंग और वयस्कों को ऑनलाइन दुर्व्यवहार से बचाने के मौजूदा सिस्टम को भी ज्यादा प्रभावी बनाने का प्रस्ताव है।