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यूजर्स के हाथ में होगा सोशल मीडिया का कंट्रोल: ऑस्ट्रेलिया सरकार लाई 'माई फीड, माई वे' कानून; क्या है यह नियम?

यूजर्स के हाथ में होगा सोशल मीडिया का कंट्रोल: ऑस्ट्रेलिया सरकार लाई 'माई फीड, माई वे' कानून; क्या है यह नियम?
यूजर्स के हाथ में होगा सोशल मीडिया का कंट्रोल: ऑस्ट्रेलिया सरकार लाई 'माई फीड, माई वे' कानून; क्या है यह नियम? हिंदीबात विशेष
तस्वीर: सऊदी क्राउन प्रिंस एमबीएस, तुर्किये राष्ट्रपति एर्दोगन और पाक पीएम शहबाज शरीफ (आधिकारिक संदर्भ)

विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया सरकार की माई फीड, माई वे पहल के तहत अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स को उनके डिफॉल्ट फीड के बारे में विकल्प देना होगा। यूजर्स चाहें तो एल्गोरिदम की ओर से सजेस्ट किए गए पर्सनलाइज्ड कंटेंट वाला फीड चुन सकते हैं। नहीं तो उनके पास दूसरा विकल्प भी होगा, जिसमें वे एल्गोरिदम आधारित कंटेंट से हटकर केवल उन्हीं दोस्तों और क्रिएटर्स की पोस्ट देख सकेंगे, जिन्हें वे खुद फॉलो करते हैं। प्रस्ताव के तहत 16 साल से अधिक उम्र के यूजर्स को यह विकल्प देने की बात कही गई है।

🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु

इस फैसले पर सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया यूजर्स को अपने ऑनलाइन अनुभव पर ज्यादा कंट्रोल मिलना चाहिए। दुनियाभर में सोशल मीडिया कंपनियों के एल्गोरिदम को सवाल उठते रहें हैं। आरोप है कि कुछ एल्गोरिदम यूजर्स को ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए उनकी पंसद से ही मिलता-जुलता कंटेंट दिखाते हैं। इससे उनका समय भी बर्बाद होता है। इसलिए सरकार ऐसा प्रस्ताव लाई है। ऐसे प्रस्ताव से सोशल मीडिया एडिक्शन के जोखिम कम हो सकेंगे और यूजर्स को अपनी पसंद के मुताबिक फीड चुनने का अधिकार भी मिल सकेगा।

अगर कोई इस प्रस्तावित नियमों का पालन नहीं करता है, तो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिकतम 10.92 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। नियमों के अनुपालन और इन्हें लागू कराने की जिम्मेदारी ऑस्ट्रेलिया के इंटरनेट सेफ्टी रेगुलेटर ई-सेफ्टी कमिश्नर की होगी।

💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट

इतना ही नहीं प्रस्तावित कानून के तहत ई-सेफ्टीको हानिकारक और अवैध ऑनलाइन सामग्री को तेजी से हटाने के लिए नोटिस जारी करने की अतिरिक्त शक्तियां भी दी जाएंगी। सरकार के मुताबिक, ई-सेफ्टी को न्यूडिफाई एप्स या वेबसाइट्स से जुड़े कंटेंट को हटाने के लिए भी नोटिस जारी करने का अधिकार मिलेगा। इसके अलावा बच्चों को साइबरबुलिंग और वयस्कों को ऑनलाइन दुर्व्यवहार से बचाने के मौजूदा सिस्टम को भी ज्यादा प्रभावी बनाने का प्रस्ताव है।

🔍 संपादकीय पड़ताल एवं स्रोत विवरण (Editorial Provenance & Verification)
✍️ रिपोर्टिंग: अमर उजाला ब्यूरो
🏛️ प्राथमिक स्रोत: अमर उजाला (Amar Ujala Breaking News)
🔬 सत्यापन डेस्क: हिंदीबात रिसर्च डेस्क (HindiBaat Research)
🛡️ पड़ताल स्थिति: ✅ तथ्य-परीक्षित एवं सत्यापित
मूल संदर्भ लिंक: मूल स्रोत देखें ↗
अ…

हिंदीबात संपादकीय डेस्क

विशेष संवाददाता

डिजिटल मीडिया आचार संहिता 2021 के अनुरूप निष्पक्ष, तथ्य-आधारित और स्वतंत्र रिपोर्टिंग। प्रत्येक खबर में 5W1H विश्लेषण और पाठक-केंद्रित स्पष्टता हमारा संकल्प है।

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