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यूपी: बादल खूब बरसे, फिर भी प्यासे रह गए प्रदेश के ये 28 जिले; मानसून की मेहरबानी में बड़ा अंतर; जानें वजह

उत्तर प्रदेश में मानसून की बारिश का वितरण असमान बना हुआ है। प्रदेश के 28 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। आठ जिलों में कमी 60 से 90 प्रतिशत तक है, जबकि 20 जिलों में 20 से 59 प्रतिशत कम वर्षा हुई।
यूपी: बादल खूब बरसे, फिर भी प्यासे रह गए प्रदेश के ये 28 जिले; मानसून की मेहरबानी में बड़ा अंतर; जानें वजह हिंदीबात विशेष
तस्वीर: सऊदी क्राउन प्रिंस एमबीएस, तुर्किये राष्ट्रपति एर्दोगन और पाक पीएम शहबाज शरीफ (आधिकारिक संदर्भ)

विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम उत्तर प्रदेश लखनऊ वाराणसी गोरखपुर मेरठ कानपुर More •••

🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु

एक ही प्रदेश, एक ही मानसून और बारिश की दो बिल्कुल अलग तस्वीरें। कहीं पानी ही पानी, कहीं बारिश की भारी कमी। उत्तर प्रदेश में कहीं बादल जमकर बरस रहे हैं तो कहीं उनके इंतजार में खेत सूखे पड़े हैं। अगस्त में भारी बारिश के दौर के बावजूद प्रदेश के आठ जिलों में सामान्य से 60 से 90 फीसदी तक कम वर्षा दर्ज की गई है।

क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में मानसून की बारिश का वितरण अब भी बेहद असमान है। आठ जिलों में सामान्य से 60 से 90 फीसदी तक कम वर्षा दर्ज की गई है। इनमें भदोही, देवरिया, कुशीनगर, कानपुर देहात, गाजियाबाद और शामली समेत अन्य जिले शामिल हैं। यानी कई इलाकों में अगस्त की तेज बारिश के बावजूद पानी की कमी बनी हुई है।

💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट

प्रदेश के 20 अन्य जिलों में भी सामान्य से 20 से 59 फीसदी तक कम बारिश हुई है। इनमें गोरखपुर, जौनपुर, महाराजगंज, मऊ, संतकबीरनगर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर और सीतापुर जैसे जिले शामिल हैं। इससे साफ है कि अच्छी बारिश का दौर आने के बावजूद मानसून का फायदा प्रदेश के सभी हिस्सों तक एक जैसा नहीं पहुंच सका।

हाल के दिनों में प्रदेश के कई जिलों में तेज और भारी बारिश हुई। कहीं सड़कों और निचले इलाकों में जलभराव हुआ तो कहीं नदियों का जलस्तर बढ़ गया। इसके उलट कम बारिश वाले जिलों में खेतों और ग्रामीण इलाकों में पानी की कमी बनी हुई है। एक ही समय में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की यह विपरीत तस्वीर मानसून के असमान वितरण को साफ तौर पर सामने ला रही है।

कम बारिश वाले जिलों के लिए अब सितंबर की बारिश बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। सितंबर मानसून का अंतिम चरण है और इसी महीने की वर्षा से अब तक की कमी कुछ हद तक पूरी होने की उम्मीद है।

🔍 संपादकीय पड़ताल एवं स्रोत विवरण (Editorial Provenance & Verification)
✍️ रिपोर्टिंग: अमर उजाला ब्यूरो
🏛️ प्राथमिक स्रोत: अमर उजाला (Amar Ujala Breaking News)
🔬 सत्यापन डेस्क: हिंदीबात रिसर्च डेस्क (HindiBaat Research)
🛡️ पड़ताल स्थिति: ✅ तथ्य-परीक्षित एवं सत्यापित
मूल संदर्भ लिंक: मूल स्रोत देखें ↗
अ…

हिंदीबात संपादकीय डेस्क

विशेष संवाददाता

डिजिटल मीडिया आचार संहिता 2021 के अनुरूप निष्पक्ष, तथ्य-आधारित और स्वतंत्र रिपोर्टिंग। प्रत्येक खबर में 5W1H विश्लेषण और पाठक-केंद्रित स्पष्टता हमारा संकल्प है।

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