● LIVE
BSE SENSEX 76,980.59
NIFTY 50 24,060.00
GOLD (10g) ₹1,60,815
SILVER (1kg) ₹86,400
USD/INR ₹83.94
संस्करण: भारत (राष्ट्रीय)
रविवार, 13 सितंबर 2026
🔴 ताज़ा सुर्खियाँ
इंडिया एआई मिशन (IndiaAI): ₹10,372 करोड़ से स्वदेशी एआई कंप्यूट प्रगति सरकारी नौकरी 2026: रेलवे RRB NTPC 11,558 और UP Police 60,244 भर्ती अपडेट शेयर बाज़ार: सेंसेक्स 81,900 के पार, निफ्टी 25,052 अंक पर मजबूत मौसम विभाग: मानसूनी बारिश और नदी जलस्तर पर 24 घंटे निगरानी अलर्ट
विश्व

रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों का असर: भारत से रिकॉर्ड पेट्रोल आयात; 2025 के कुल आयात को छोड़ा पीछे

रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों का असर: भारत से रिकॉर्ड पेट्रोल आयात; 2025 के कुल आयात को छोड़ा पीछे
रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों का असर: भारत से रिकॉर्ड पेट्रोल आयात; 2025 के कुल आयात को छोड़ा पीछे हिंदीबात विशेष
तस्वीर: सऊदी क्राउन प्रिंस एमबीएस, तुर्किये राष्ट्रपति एर्दोगन और पाक पीएम शहबाज शरीफ (आधिकारिक संदर्भ)

विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम कारोबार बिज़नेस डायरी बाजार स्टार्टअप्स कॉर्पोरेट पर्सनल फाइनेंस More •••

🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु

सीआरईए के मुताबिक, भारत से रूस भेजा गया पूरा पेट्रोल वाडिनार रिफाइनरी से लोड किया गया था। यह रिफाइनरी नायरा एनर्जी के नियंत्रण में है, जिसमें रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट की 49.13 प्रतिशत हिस्सेदारी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वाडिनार रिफाइनरी ने 2026 के शुरुआती आठ महीनों में अपनी जरूरत का पूरा कच्चा तेल रूस से खरीदा। इसकी तुलना में 2025 में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत थी। सीआरईए ने इस व्यापार को खास तौर पर उल्लेखनीय बताते हुए कहा कि रूस अपनी ही हिस्सेदारी वाली रिफाइनरी से अपने कच्चे तेल को ईंधन में बदलवा रहा है और फिर उसी ईंधन को वापस रूस मंगा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के पेट्रोल आयात में यह बढ़ोतरी यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के बीच हुई है। यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया है, जिससे घरेलू ईंधन उत्पादन प्रभावित हुआ और कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल की कमी की स्थिति बनी। अगस्त में रूस के कुल तेल उत्पाद आयात में पेट्रोल की हिस्सेदारी 74 प्रतिशत रही। 2023 से 2025 के बीच यह औसतन केवल 6 प्रतिशत थी। इससे रूस की घरेलू ईंधन आपूर्ति पर हमलों के असर का अंदाजा लगाया जा सकता है।

💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट

सीआरईए के अनुसार, वाडिनार से रूस भेजे गए पेट्रोल के प्रत्येक कार्गो को मिस्र के तट के पास जहाज-से-जहाज स्थानांतरण के जरिए दूसरे जहाज में स्थानांतरित किया गया। इसके बाद इसे रूस के आर्कटिक बंदरगाह बेलोये मोरे पर उतारा गया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस कारोबार में शामिल सभी जहाज प्रतिबंधों के दायरे में थे। छह में से चार जहाज पहले कथित तौर पर गलत झंडे के तहत संचालन कर चुके थे।

यूक्रेनी हमलों का असर रूस के काला सागर स्थित नोवोरोसिस्क बंदरगाह से कच्चे तेल के निर्यात पर भी पड़ा। अगस्त में यहां से कच्चे तेल की लोडिंग जुलाई के मुकाबले 58 प्रतिशत कम रही। सीआरईए के अनुसार, बंदरगाह पर लगातार नौ दिनों तक लोडिंग पूरी तरह बंद रही। पूर्ण पैमाने के युद्ध की शुरुआत के बाद यह इस बंदरगाह पर दर्ज सबसे लंबी रुकावट थी।

इसके बावजूद भारत अगस्त में रूस का दूसरा सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन खरीदार बना रहा। पहले स्थान पर चीन रहा। सीआरईए के अनुसार, भारत ने अगस्त में रूस से कुल 4.8 अरब यूरो मूल्य के हाइड्रोकार्बन खरीदे। इसमें कच्चे तेल की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही और इसकी कीमत करीब 4.1 अरब यूरो यानी कुल खरीद का 87 प्रतिशत थी। हालांकि, जुलाई की तुलना में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात 24 प्रतिशत घटा। इससे पहले लगातार दो महीनों में यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। जामनगर रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल की आवक 15 प्रतिशत घटी, जबकि वाडिनार में 5 प्रतिशत और पारादीप में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

अगस्त में चीन रूस का सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन खरीदार रहा। रूस के पांच सबसे बड़े खरीदारों से होने वाले राजस्व में चीन की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत, यानी करीब 8.4 अरब यूरो रही। चीन में रूस से समुद्री मार्ग के जरिए आने वाले कच्चे तेल का आयात जुलाई की तुलना में 16 प्रतिशत बढ़ा। अगस्त 2025 के मुकाबले यह आयात 62 प्रतिशत अधिक रहा।

रूस के जीवाश्म ईंधन निर्यात से होने वाला कुल राजस्व अगस्त में 8 प्रतिशत घटकर प्रतिदिन 60.4 करोड़ यूरो रह गया। निर्यात की मात्रा भी 7 प्रतिशत कम हुई। हालांकि, वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेजी ने रूस को कुछ राहत दी। सीआरईए के अनुसार, अगस्त में रूस के कच्चे तेल की औसत कीमत 23 प्रतिशत बढ़कर 69.90 डॉलर प्रति बैरल हो गई। यह जी-7 और यूरोपीय संघ की ओर से तय 44.10 डॉलर प्रति बैरल की मूल्य सीमा से काफी ऊपर थी। सीआरईए ने अनुमान लगाया कि ईरान पर अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद तेल और गैस की ऊंची कीमतों के कारण छह महीनों में रूस के समुद्री जीवाश्म ईंधन निर्यात राजस्व में करीब 31 अरब यूरो की अतिरिक्त बढ़ोतरी हुई।

🔍 संपादकीय पड़ताल एवं स्रोत विवरण (Editorial Provenance & Verification)
✍️ रिपोर्टिंग: अमर उजाला ब्यूरो
🏛️ प्राथमिक स्रोत: अमर उजाला (Amar Ujala Breaking News)
🔬 सत्यापन डेस्क: हिंदीबात रिसर्च डेस्क (HindiBaat Research)
🛡️ पड़ताल स्थिति: ✅ तथ्य-परीक्षित एवं सत्यापित
मूल संदर्भ लिंक: मूल स्रोत देखें ↗
अ…

हिंदीबात संपादकीय डेस्क

विशेष संवाददाता

डिजिटल मीडिया आचार संहिता 2021 के अनुरूप निष्पक्ष, तथ्य-आधारित और स्वतंत्र रिपोर्टिंग। प्रत्येक खबर में 5W1H विश्लेषण और पाठक-केंद्रित स्पष्टता हमारा संकल्प है।

👉 आगे क्या पढ़ें | अगली बड़ी स्टोरी 5 मिनट पहले

चीन की ख़ुद की ज़रूरत क्या उसे भारत के क़रीब ला रही है?

साल 2020 में गलवान घाटी में झड़प के बाद भारत और चीन के बीच रिश्ते काफ़ी तनावपूर्ण हो गए थे लेकिन अब इसमें काफ़ी बदलाव आय…

यह विश्लेषण जारी रखें ➔