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🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
मुंढे ने कहा कि खाद्य और औषधि क्षेत्र सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य से जुड़ा है। अगर उनके काम और भूमिका के कारण यह मुद्दा सार्वजनिक चर्चा का विषय बनता है तो उन्हें खुशी होगी। उन्होंने कहा कि नागरिकों को जनस्वास्थ्य को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल करना चाहिए। उनके मुताबिक, स्वस्थ मानव संसाधन के बिना भारत सुपरपावर नहीं बन सकता।
स्विगी और जोमैटो जैसी ऑनलाइन फूड ऑर्डर और डिलीवरी कंपनियों की जिम्मेदारी पर मुंढे ने कहा कि कानून के तहत ये भी फूड बिजनेस ऑपरेटर हैं। उनके मुताबिक, इन कंपनियों के गोदाम भी हैं और एफडीए ने इनके खिलाफ कार्रवाई की है।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से एफडीए की कार्रवाई पर सवाल उठाए जाने के संदर्भ में मुंढे ने कहा कि मामले में कोई बड़ी प्रक्रियात्मक गलती नहीं हुई थी। उन्होंने इसे एक छोटी गलती बताया। एफडीए ने पुणे स्थित सिप्ला की इकाई में दवाओं के भंडारण और रखरखाव में गंभीर अनियमितताओं के चलते दवा बिक्री लाइसेंस रद्द किए थे। मुंढे के मुताबिक, एक अधिकारी ने कंपनी को आखिरी बार अपना पक्ष रखने का मौका दिया, लेकिन सुनवाई सार्वजनिक अवकाश के दिन रखी गई थी। इसके बाद नोटिस दोबारा जारी किया गया है और इस पर फैसला लिया जा रहा है।
मुंढे ने कहा कि एफडीए कानून के मुताबिक काम कर रहा है और मौजूदा एसओपी में बदलाव की जरूरत नहीं है। हालांकि, अगर कोई प्रक्रियात्मक गलती होती है तो उसे गंभीरता से लिया जाता है। मुंढे ने कहा कि फिलहाल एफडीए की प्रयोगशालाएं पर्याप्त हैं, लेकिन उनकी क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से राज्य में चार नई प्रयोगशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्टाफिंग पैटर्न से जुड़ा प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है। उनके मुताबिक, स्वीकृत पदों में से अधिकांश भरे जा चुके हैं। हालांकि, ड्रग इंस्पेक्टर के पदों पर भर्ती परीक्षा रद्द होने के कारण रिक्तियां बनी हुई हैं।
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग ने एफडीए में ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-B) पदों पर भर्ती के लिए मार्च में परीक्षा कराई थी। परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता भंग होने के बाद इसे रद्द कर दिया गया। इस मामले में प्रश्नपत्र लीक से जुड़े आरोपों को लेकर अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुंढे के मुताबिक, महाराष्ट्र में खाद्य और दवा सुरक्षा को लेकर कार्रवाई का उद्देश्य किसी व्यक्ति की लोकप्रियता बढ़ाना नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य को बेहतर बनाना है।