विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम कारोबार बिज़नेस डायरी बाजार स्टार्टअप्स कॉर्पोरेट पर्सनल फाइनेंस More •••
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
ईडी ने हाई कोर्ट को बताया कि माल्या ने भारत लौटने या सक्षम आपराधिक अदालत के अधिकार क्षेत्र में पेश होने से इन्कार किया है। हाई कोर्ट की पूछताछ के बावजूद माल्या ने अपने जवाबों में अस्पष्टता बनाए रखी। एजेंसी ने जोर देकर कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत शुरू किया गया आपराधिक अभियोजन अप्रभावी नहीं होता। यह केवल इसलिए नहीं रुकता क्योंकि बैंकों ने बाद में संपत्ति से पर्याप्त राशि वसूल कर ली है। पीएमएलए के तहत संपत्ति की बहाली वैध दावेदारों के नुकसान की वसूली के लिए एक वैधानिक तंत्र है।
माल्या पर मनी लॉन्ड्रिंग और कम से कम 3,500 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है। यह राशि उनकी अब बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए 9,000 करोड़ रुपये के बैंक ऋण का हिस्सा थी। ईडी ने 2016 में माल्या की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। इन संपत्तियों में यूनाइटेड ब्रुअरीज होल्डिंग्स लिमिटेड (यूबीएचएल) के शेयर भी शामिल थे। 2019 में एक विशेष अदालत ने एसबीआई और अन्य ऋणदाता बैंकों को माल्या की कुर्क की गई चल संपत्तियों का उपयोग ऋण वसूली के लिए करने की अनुमति दी थी।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
ईडी ने अपने हलफनामे में कहा कि माल्या लगातार कानून की प्रक्रिया से बच रहे हैं। वे भारत नहीं लौटे हैं और न ही उन्होंने खुद को सक्षम आपराधिक अदालत के अधिकार क्षेत्र में पेश किया है। बार-बार समन और गैर-जमानती वारंट के बावजूद उनकी अनुपस्थिति बनी हुई है। उन्हें नवंबर 2016 में भगोड़ा अपराधी घोषित किया गया था। हाईकोर्ट की ओर से पूछे जाने पर भी उन्होंने भारत लौटने को लेकर कोई साफ जवाब नहीं दिया।