विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: सोनीपत में रहती थी तो लोग कहते थे कि ये लड़की है, इसे बॉक्सिंग करने की क्या ज़रूरत है, इसकी शादी करो और रवाना करो. ये ताने हर रोज़ के थे.
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
एक दिन अनुरीत ने ठान लिया कि बहुत हो गया. अपनी मोटरसाइकल उठाई और हरियाणा के सोनीपत से उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर आ गईं.
शुरुआत में खाने को खाना नहीं था, डाइट नहीं थी, पहनने को अच्छे कपड़े नहीं थे, बॉक्सिंग करने के लिए ग्लव्स नहीं थे, लेकिन एक चीज़ थी और वही काफ़ी साबित हुई, अनुरीत की हिम्मत.
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
इसी हिम्मत, ज़िद और हौसले के दम पर अनुरीत ने एक सपना देखा और उस सपने को पूरा करने के लिए जी-जान से जुटी हैं.
वो जिस कमरे में रहती हैं, वो बहुत छोटा है, लेकिन गोल्ड मेडल तक पहुंचने का उनका सपना बहुत बड़ा है, और उनकी कोशिशें, उससे भी बड़ी हैं.
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