विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम शिक्षा देश शहर और राज्य चुनाव LIVE कारोबार More •••
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
बांदा के संजय प्रयागराज से स्नातक के बाद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली आए थे। अंग्रेजी कमजोर होने के कारण उन्हें परेशानी होती थी। समिति के अंग्रेजी बोलचाल केंद्र से जुड़ने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा। बाद में उन्होंने इसी केंद्र में बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। आज वह दिल्ली सरकार के विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं।
आदित्य ने आरके पुरम के बाल संस्कार केंद्र से पढ़ाई शुरू की। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई पूरी कर स्नातक किया। बच्चों को पढ़ाने के दौरान उनमें आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और नेतृत्व क्षमता विकसित हुई। आज वह एक निजी कंपनी में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
शिक्षिका आरती कानूंगो पिछले 24 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वह दिल्ली सरकार के सर्वोदय कन्या विद्यालय में अंग्रेजी भाषा शिक्षिका हैं। कक्षा से बाहर भी वह विद्यार्थियों के साथ विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर काम करती हैं। उनके कार्यों के लिए उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार समेत कई सम्मान मिले हैं। वर्ष 2026 में उन्हें आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से श्री श्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
शुभम सिंह ने भी अपनी शिक्षा की शुरुआत पुनर्जागरण समिति के बांदा केंद्र से की थी। संस्था से उन्हें अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी की सीख मिली। मेहनत और लगन से आगे बढ़ते हुए आज शुभम समिति में सेंटर हेड की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
रोहिणी सेक्टर-15 स्थित राजकीय सहशिक्षा विद्यालय के पीजीटी अंग्रेजी शिक्षक जय राम भी अभिनव तरीके से बच्चों को पढ़ाने पर जोर देते हैं। उन्होंने करीब 22 वर्षों तक टीजीटी प्राकृतिक विज्ञान के रूप में अध्यापन किया है। अंग्रेजी पढ़ाते हुए उनका जोर केवल भाषा पर नहीं, बल्कि बच्चों में आलोचनात्मक सोच, समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने पर रहता है।
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।