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🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में शहरों के प्रदर्शन का आकलन सड़क की धूल पर नियंत्रण, ठोस कचरा प्रबंधन, वाहनों से होने वाले प्रदूषण, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण एवं विध्वंस- सीएंडडी कचरा प्रबंधन, खुले में कचरा जलाने पर नियंत्रण और जन-जागरूकता जैसी गतिविधियों के आधार पर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने की और स्वच्छ हवा हासिल करना असंभव लक्ष्य नहीं है। इसके लिए बेहतर योजना और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन कर शहर वायु गुणवत्ता में सुधार ला सकते हैं। उन्होंने स्थानीय निकायों को प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
लखनऊ की इस उपलब्धि को लेकर इस मौके पर मेयर सुषमा बर्कवाल ने कहा यह सफलता योगी आदित्यनाथ के अथक प्रयासों का नतीजा है। जिसमें नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में नगर निगम और शहरवासियों के अथक सहयोग से यह संभव हो सका है। इस सफलता की वजह, कचरा प्रबंधन, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, घरों से कूड़ा एकत्र करने के लिए 11 सौ इलेक्ट्रिक वाहन, सड़क से धूल साफ करने के लिए पूरी तरह से मशीनों का प्रयोग, कचरा प्रबंधन के लिए सौ फीसदी वैज्ञानिक प्रबंधन किया गया। निर्माण और विध्वंस का सौ फीसदी निस्तारण है।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
हर साल यह पुरस्कार 3 समूहों तीन लाख से कम जनसंख्या 3 से 10 लाख जनसंख्या और 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले 24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 130 शहरों की रैकिंग पर आधारित है। इसमें 10 शहरों के कड़े मानकों पर परख कर चुना जाता है। इस बार के सर्वेक्षण में दिल्ली 21 वें स्थान, मुंबई 28 वें स्थान पर, रायपुर छठे, दुर्ग भिलाई 17वें स्थान पर है। 3 लाख से 10 लाख की आबादी वाले शहरों में उड़ीसा के राउरकेला को पहला, उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद और गुंटूर को दूसरा स्थान और छत्तीसगढ़ के कोरबा को तीसरा स्थान मिला है।