एजेंसी के मुताबिक, फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर या अवैध रूप से किसी सिस्टम तक पहुंचकर नफरत फैलाने वाले भाषण, जातीय उकसावे या हिंसा के लिए नफरत फैलाना दंडनीय अपराध है, जिसकी सजा दो साल तक की जेल और अधिकतम 10 लाख टका जुर्माने तक हो सकती है।
बांग्लादेश में सेंसरशिप: यूनुस की अंतरिम सरकार का मीडिया को निर्देश, शेख हसीना के बयानों को न प्रकाशित करें
admin
18 November 2025
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