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🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
भारत की मेजबानी में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के लिए दिल्ली को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। दुनिया के बड़े नेताओं की मौजूदगी के बीच सुरक्षा का दायरा सिर्फ सड़कों और कार्यक्रम स्थल तक सीमित नहीं है, बल्कि एयरपोर्ट से लेकर होटल, वीआईपी रूट, आसमान और डिजिटल गतिविधियों तक निगरानी रखी जा रही है। खासतौर पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सुरक्षा के लिए अलग और बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। आखिर दिल्ली में कैसी है सुरक्षा की यह पूरी व्यवस्था? विदेशी नेताओं की सुरक्षा के लिए क्या-क्या खास तैयारी की गई है? आइये जानते हैं...
सुरक्षा व्यवस्था - फोटो : Amar Ujala होटल के कर्मचारियों से लेकर छत तक जांच विदेशी नेताओं के ठहरने वाले होटलों में कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था है। जिन मंजिलों पर राष्ट्राध्यक्ष ठहरेंगे, वहां से लेकर होटल की छत और ग्राउंड फ्लोर तक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। रूस और चीन की विशेष सुरक्षा टीमें भी पहले ही दिल्ली पहुंच चुकी हैं और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने संबंधित होटलों के कर्मचारियों का भी सत्यापन किया है। उनके दिल्ली स्थित रिकॉर्ड के साथ-साथ गृह राज्यों में भी वेरिफिकेशन कराया गया है।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
सुरक्षा व्यवस्था - फोटो : Amar Ujala पुतिन के लिए चार स्तर की सुरक्षा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर आज सुबह दिल्ली पहुंच चुके हैं। उनकी सुरक्षा के लिए दिल्ली में विशेष व्यवस्था की गई है। उनके ठहरने वाले होटल को अभेद्य किले में तब्दील किया गया है और वहां चार स्तर का सुरक्षा घेरा बनाया गया है।
पुतिन के साथ उनकी अपनी रूसी सुरक्षा टीम भी रहेगी। करीब 25 से 30 कमांडो और सुरक्षाकर्मी उनके साथ रहेंगे। उनके होटल में एक एडिशनल डीसीपी और दो एसीपी अलग-अलग शिफ्ट में तैनात किए गए हैं।
पुतिन की विदेश यात्राओं से जुड़ी एक बेहद असामान्य सुरक्षा व्यवस्था की चर्चा 'पूप सूटकेस' के नाम से होती है। दावा किया जाता है कि उनके बॉडीगार्ड विदेश यात्रा के दौरान उनके मल को विशेष तरीके से इकट्ठा करते हैं और उसे सुरक्षित करके रूस वापस ले जाते हैं। इसके पीछे तर्क यह बताया जाता है कि वेस्ट सैंपल से किसी व्यक्ति की सेहत से जुड़ी कई जानकारियां हासिल की जा सकती हैं। रिपोर्टों में बीमारी, हार्मोन स्तर और कुछ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के संकेत मिलने की बात कही गई है। इसी वजह से पुतिन के वेस्ट सैंपल को विदेशी एजेंसियों तक पहुंचने से रोकने की बात कही जाती है।