विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम कारोबार बिज़नेस डायरी बाजार स्टार्टअप्स कॉर्पोरेट पर्सनल फाइनेंस More •••
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
बैंक के बोर्ड ने गवर्नेंस, नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर शनिवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया। यह प्रक्रिया बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट और आरबीआई के 'कमर्शियल बैंक्स - गवर्नेंस डायरेक्शंस, 2025' के तहत पूरी की गई है। हालांकि, बैंक ने अपनी रेगुलेटरी फाइलिंग में आरबीआई को भेजे गए दोनों उम्मीदवारों के नामों का खुलासा नहीं किया है। रिजर्व बैंक से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही नए एमडी और सीईओ के नाम की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
बोर्ड ने बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र में 35 से अधिक वर्षों का अनुभव रखने वाले जिमी टाटा को होल-टाइम डायरेक्टर के रूप में नियुक्त करते हुए एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर का पदनाम दिया है। जिमी टाटा 1994 से एचडीएफसी बैंक से जुड़े हुए हैं और वर्तमान में बैंक के चीफ क्रेडिट ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वह बैंक के चीफ रिस्क ऑफिसर की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उनकी यह नियुक्ति आरबीआई की मंजूरी की तारीख से तीन साल की अवधि के लिए प्रभावी होगी।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
नेतृत्व पुनर्गठन के तहत बोर्ड ने 66 वर्षीय वी श्रीनिवासन रंगन को 23 नवंबर 2026 से 22 नवंबर 2027 तक एक साल के लिए पुनः होल-टाइम डायरेक्टर और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त करने को मंजूरी दी है। जुलाई 2023 में एचडीएफसी लिमिटेड के बैंक में विलय से पहले रंगन एचडीएफसी लिमिटेड में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीएफओ थे। वर्तमान में वह एचआर, कॉर्पोरेट लीगल, ग्रुप ओवरसाइट, सीक्रेटेरियल, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी, एथिक्स और फ्रॉड एंड विजिलेंस विभागों की देखरेख करते हैं।
एचडीएफसी बैंक ने अपने बोर्ड में एमडी और सीईओ के अलावा एक अतिरिक्त होल-टाइम डायरेक्टर का पद बनाने का निर्णय लिया है। इससे बैंक में एमडी और सीईओ के अलावा होल-टाइम डायरेक्टरों की कुल संख्या बढ़कर चार हो जाएगी। बैंक के अनुसार, इस नए पद का मुख्य उद्देश्य बैंक की सहायक कंपनियों पर बेहतर निगरानी रखना, संचालन में तालमेल बिठाना और भावी नेतृत्व के लिए मजबूत पाइपलाइन तैयार करना है। इस नए पद पर नियुक्ति नए एमडी और सीईओ के पदभार ग्रहण करने के बाद उनकी सलाह से की जाएगी।
एचडीएफसी बैंक का यह पुनर्गठन संस्थागत स्थिरता और सुचारू उत्तराधिकार योजना की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। देश के सबसे बड़े निजी बैंक में शीर्ष स्तर पर हो रहे इन बदलावों से रेगुलेटरी अनुपालन मजबूत होगा और बैंक की सहायक इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा। बोर्ड के इन सभी प्रस्तावों को लागू करने के लिए रिजर्व बैंक की अंतिम स्वीकृति और यथासमय शेयरधारकों की मंजूरी मिलना अनिवार्य रहेगा।