विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम कारोबार बिज़नेस डायरी बाजार स्टार्टअप्स कॉर्पोरेट पर्सनल फाइनेंस More •••
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन के बाद विदेश मंत्रालय ने साझा ब्रिक्स करेंसी को लेकर उठ रही तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है। विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने शनिवार को स्पष्ट किया कि वर्तमान में ब्रिक्स देशों के लिए एक साझा मुद्रा लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने बताया कि सदस्य देशों का मुख्य ध्यान द्विपक्षीय व्यापार को अपनी-अपनी स्थानीय मुद्राओं में निपटाने पर केंद्रित रहेगा, जिससे लेन-देन की लागत को कम किया जा सके।
18वें ब्रिक्स सम्मेलन में अपनाए गए 'नई दिल्ली घोषणापत्र' में ब्रिक्स स्थानीय मुद्राओं के माध्यम से व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए जारी चर्चाओं को स्वीकार किया गया है। घोषणापत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि सभी सदस्य देशों की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान किया जाएगा, क्योंकि इस मामले में 'सबके लिए एक ही नियम' लागू नहीं हो सकता। स्थानीय मुद्रा में व्यापार के व्यावहारिक क्रियान्वयन के लिए गठित 'ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स' (बीपीटीएफ) को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं:
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
भारत की 8 महीने की अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं। ये बैठकें विभिन्न मंत्रालयों, कार्य समूहों, विषयगत क्लस्टरों और व्यापारिक सत्रों के स्तर पर संपन्न हुईं। सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स नेताओं ने वर्तमान वैश्विक संघर्षों और आर्थिक अनिश्चितताओं के प्रभाव पर भी विस्तार से चर्चा की। इसमें निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर आम सहमति रही:
विदेश मंत्रालय के इस बयान से साफ है कि ब्रिक्स देश किसी नई साझा मुद्रा की जगह अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को व्यापार में प्राथमिकता देंगे। स्थानीय मुद्राओं में सौदों का निपटान होने से सदस्य देशों के कारोबारियों के लिए मुद्रा विनिमय दर का जोखिम और ट्रांजैक्शन कॉस्ट कम होगी। आगे चलकर ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स की प्रगति यह तय करेगी कि सदस्य देशों के बीच भुगतान प्रणाली कितनी तेज और सुरक्षित बनती है।