विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम मनोरंजन मूवी रिव्यूज बॉलीवुड भोजपुरी साउथ सिनेमा साक्षात्कार More •••
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वेब सीरीज ‘चुम्बक’ रिव्यू - फोटो : अमर उजाला निर्देशन: हंसी थोड़ी आती है, पर सीन कुछ ज्यादा देर चलते हैं आतिश कपाड़िया ने कॉलोनी को रोजमर्रा की जिंदगी जैसा रखा है। घर, गलियां और पड़ोसियों का एक-दूसरे के घर आना-जाना सब जाना-पहचाना लगता है। सीरीज की असली दिक्कत सीन की रफ्तार में है। कई बार मजाक निकल चुका होता है, फिर भी सीन चलता रहता है। कुछ जगह कलाकारों के हावभाव ही उस हिस्से को संभालते हैं। सीन थोड़े छोटे और तेज होते तो कॉमेडी ज्यादा अच्छी लगती।
देखें या नहीं? ‘चुम्बक’ में कुछ किरदार और कुछ सीन जरूर याद रह जाते हैं, मगर पूरी सीरीज का असर उतना नहीं रहता। कॉमेडी पसंद करने वालों के लिए भी इसमें ऐसा बहुत कुछ नहीं है, जो इसे बाकी पड़ोस वाली कॉमेडी से अलग खड़ा करे। अगर देखने के लिए आपके पास और विकल्प हैं, तो ‘चुम्बक’ को स्किप कर सकते हैं।