विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: होम उत्तर प्रदेश आगरा लखनऊ वाराणसी गोरखपुर मेरठ कानपुर More •••
🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
छुट्टी में भी गुमसुम रहा आशीष 16 अगस्त को छुट्टी पर घर आया था और तीन सितंबर को वापस ड्यूटी पर गया था। पिता त्रिभुवननाथ ने बताया कि आशीष मिलनसार स्वभाव का था। इस बार छुट्टी में वह न तो किसी दोस्त से मिलने गया और न ही बाहर निकला। वह गुमसुम रहता था। इस बारे में पूछने पर भी उसने कुछ नहीं बताया। पिता स्वयं उसे ड्यूटी के लिए थाने तक छोड़कर आए थे। उस समय उन्हें ऐसा कोई अंदेशा नहीं था कि बेटा इतना बड़ा कदम उठा सकता है।
इस बार बदला हुआ था व्यवहार ग्रामीणों के अनुसार आशीष जब भी छुट्टी पर घर आता था तो दोस्तों और परिचितों से जरूर मिलता था, लेकिन इस बार उसका व्यवहार बदला हुआ नजर आया। आशीष दो भाइयों में बड़ा था। छोटा भाई संतोष 18 वर्ष महाराष्ट्र में हलवाई का काम करता है। उसकी एक छोटी बहन की अभी शादी नहीं हुई है, जबकि दूसरी बहन शादीशुदा है। पिता खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आशीष के पुलिस में भर्ती होने के बाद परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं। उसकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
आशीष की नौकरी से परिवार को थीं बड़ी उम्मीदें हीरापुरा निवासी आशीष वर्मा के पुलिस विभाग में भर्ती होने से परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं। वर्ष 2025 में पुलिस में भर्ती होने के बाद प्रशिक्षण पूरा कर हापुड़ के धौलाना थाने में तैनाती मिली थी। परिवार को उम्मीद थी कि आशीष नौकरी में आगे बढ़कर घर की जिम्मेदारियां संभालेगा, लेकिन रविवार को उसकी मौत की खबर ने परिवार को झकझोर दिया।पिता त्रिभुवननाथ खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां राजकुमारी और पिता हुए बेसुध बेटे के पुलिस में भर्ती होने के बाद जिस परिवार में खुशियों का माहौल था, रविवार को उसकी मौत की खबर पहुंचते ही वहां चीख-पुकार मच गई। हापुड़ के धौलाना थाने में सिपाही आशीष वर्मा की मौत की खबर सुनकर मां राजकुमारी और पिता त्रिभुवननाथ बेसुध हो गए। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घर में मौजूद रिश्तेदार और ग्रामीण उन्हें संभालने में जुटे रहे।