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🔍 विस्तृत घटनाक्रम एवं मुख्य बिंदु
AI In School Education: स्कूलों में पढ़ाई का तरीका अब सिर्फ किताब और कक्षा तक सीमित नहीं रहने वाला है। शिक्षक दिवस पर असम, बिहार और झारखंड से सामने आए कदम बताते हैं कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी तेज हो रही है। असम ने करीब एक लाख शिक्षकों को एआई का प्रशिक्षण देने की योजना बनाई है, वहीं बिहार ने गूगल के साथ शिक्षकों को एआई उपकरणों की जानकारी देने के लिए करार किया है। झारखंड ने भी एआई और नई तकनीक को पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाने से जोड़ा है।
असम सरकार ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई तकनीक के इस्तेमाल के लिए छह संस्थाओं के साथ समझौता किया है। शिक्षा मंत्री रानोज पेगू ने बताया कि इन सहयोगों का उद्देश्य समावेशी और विद्यार्थियों की जरूरत के अनुसार सीखने की व्यवस्था तैयार करना है। इन समझौतों के तहत शिक्षा के अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया जाएगा। सबसे बड़ी योजना शिक्षकों को एआई के लिए तैयार करने की है। कक्षा 6 से 12 तक के करीब एक लाख शिक्षकों को मई 2027 तक एआई दक्षता का प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव है।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
असम में एआई का इस्तेमाल केवल शिक्षक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहेगा। अलग-अलग संस्थाओं के साथ हुए सहयोग में विद्यार्थियों की पढ़ाई और मूल्यांकन को भी शामिल किया गया है।
बिहार में भी स्कूल शिक्षा में एआई के इस्तेमाल की दिशा में तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार शिक्षकों को एआई उपकरणों का प्रशिक्षण देने के लिए गूगल के साथ समझौता कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को नई तकनीक और एआई के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे बेहतर तरीके से पढ़ा सकें। बिहार में माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और सर्वम एआई के सहयोग से आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता तंत्र विकसित करने की भी बात कही गई है।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शिक्षक दिवस पर कहा कि समय के साथ शिक्षा व्यवस्था भी बदल रही है। उनके मुताबिक, एआई और नई तकनीक पढ़ाने की प्रक्रिया को अधिक सहज और प्रभावी बनाने के साथ उसे विद्यार्थियों की जरूरत के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करने और उसे मजबूत करने के लिए सुधार के प्रयास कर रही है। साथ ही नई तकनीक के साथ बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने पर जोर दिया जा रहा है।
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