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व्हाइट हाउस के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन में मौजूद ईरानी बारूदी सुरंगों को साफ कर दिया गया है। अमेरिकी सुरक्षा में करीब 1,500 वाणिज्यिक जहाज इस जलमार्ग से गुजर चुके हैं। इन जहाजों के जरिए लगभग 75 करोड़ बैरल कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा है। अमेरिकी प्रशासन ने यह भी दावा किया कि जुलाई में अमेरिकी नाकाबंदी दोबारा शुरू होने के बाद से ईरान के तट से कोई तेल निर्यात नहीं हुआ है। अमेरिका का कहना है कि नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश करने वाले 75 जहाजों को वापस लौटाया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगस्त में कई बार होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण की बात कह चुके हैं। 10 अगस्त को उन्होंने कहा था कि फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी नौसेना का नियंत्रण है। गुरुवार को भी ट्रंप ने दावा किया कि जलमार्ग खुला है, लेकिन अमेरिका के नियंत्रण और नाकाबंदी के कारण ईरान को इससे कोई फायदा नहीं मिल रहा है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, अमेरिकी अभियान के बाद खाड़ी से तेल निर्यात युद्ध-पूर्व स्तर के करीब दो-तिहाई तक वापस आ गया है और इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
💬 आधिकारिक बयान एवं रिपोर्ट
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि सैन्य अभियान और ईरानी तेल निर्यात पर लगाई गई नाकाबंदी से रणनीतिक जलमार्ग को दबाव के तौर पर इस्तेमाल करने की तेहरान की क्षमता कमजोर हुई है। पूर्व अमेरिकी उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार केटी मैकफारलैंड ने कहा कि ईरान ने होर्मुज को बंद करके अपनी स्थिति का गलत आकलन किया। वहीं, वेस्ट प्वाइंट में अर्बन वॉरफेयर स्टडीज के अध्यक्ष जॉन स्पेंसर ने भी अमेरिकी नाकाबंदी को प्रभावी बताया। स्पेंसर ने दावा किया कि ईरान के होर्मुज बंद करने के दावे सही नहीं हैं और तेहरान समुद्री यातायात को प्रभावी ढंग से रोक नहीं पाया है।
व्हाइट हाउस ने कहा कि होर्मुज की नाकाबंदी ईरान पर बनाए जा रहे व्यापक आर्थिक दबाव का हिस्सा है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य ईरान की आय के स्रोतों को सीमित करना और उसकी आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ाना है। व्हाइट हाउस ने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ का भी उल्लेख किया, जिसे ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने और उसकी वित्तीय गतिविधियों पर रोक लगाने की अमेरिकी कोशिश के रूप में बताया गया है। अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान पर तब तक दबाव बनाए रखेंगे, जब तक वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए खतरा पैदा करने की स्थिति में नहीं रहता। हालांकि, बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि अमेरिका नाकाबंदी कब खत्म करेगा या इसके लिए कौन-सी सैन्य अथवा कूटनीतिक शर्तें लागू होंगी।