
वंदेमातरम के 150 साल पूरा होने पर संसद में इस पर बहस चल रही है, जिसमें दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। यह जानना दिलचस्प होगा कि इस गीत को लेकर शुरू में वीर सावरकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का क्या रुख था। क्यों शुरू में इसे कांग्रेसी गीत ज्यादा माना जाता था।
वंदेमातरम गीत की रचना बंकिम चंद्र चटोपाध्याय ने वर्ष 1875 में की थी। इस गीत ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वीर सावरकर, जो एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे, ने वंदेमातरम को एक शक्तिशाली राष्ट्रीय गीत के रूप में देखा। उन्होंने इस गीत को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए एक प्रेरणा के स्रोत के रूप में माना।
लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शुरू में वंदेमातरम को कांग्रेसी गीत के रूप में देखा। संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार ने वंदेमातरम को एक हिंदू राष्ट्रवादी गीत के रूप में नहीं देखा, बल्कि उन्होंने इसे कांग्रेस के साथ जोड़कर देखा। यह इसलिए था क्योंकि कांग्रेस ने वंदेमातरम को अपने राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया था। संघ ने यह माना था कि वंदेमातरम कांग्रेस के प्रभाव में आकर लिखा गया था, और इसलिए इसे कांग्रेसी गीत के रूप में देखा जाना चाहिए।
हालांकि, बाद में संघ ने अपने रुख में बदलाव किया और वंदेमातरम को एक राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया। आज, वंदेमातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है और इसे देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। वंदेमातरम के 150 साल पूरे होने पर संसद में हो रही बहस इस गीत के महत्व को दर्शाती है और यह दिखाती है कि यह गीत आज भी भारतीयों के दिलों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
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