
सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की जमानत बरकरार रखी, 3 महीने में फैसला करने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग से रेप मामले में आसाराम को मिली छह महीने की जमानत बरकरार रखी है और राजस्थान हाई कोर्ट को तीन महीने में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया है। आसाराम की ओर से खराब सेहत का हवाला दिया गया, जबकि पीड़िता की वकील ने इसका विरोध किया। यह मामला जोधपुर के एक आश्रम में 2013 में नाबालिग लड़की के साथ हुए रेप से जुड़ा है, जिसमें आसाराम को मुख्य आरोपी बनाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला आसाराम की जमानत को रद्द करने की मांग पर सुनवाई के दौरान दिया। आसाराम की ओर से अदालत में कहा गया कि उनकी सेहत खराब है और उन्हें जमानत मिलनी चाहिए, जबकि पीड़िता की वकील ने इसका विरोध किया और कहा कि आसाराम को जमानत नहीं मिलनी चाहिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और कहा कि वह इस जमानत को रद्द करने की मांग पर दखल नहीं देगी और राजस्थान हाई कोर्ट को तीन महीने में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया है।
यह फैसला आसाराम के लिए एक बड़ी राहत है, लेकिन पीड़िता और उसके परिवार के लिए यह एक बड़ा झटका है। पीड़िता की वकील ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ आगे की कार्रवाई करेंगे। आसाराम के समर्थकों ने इस फैसले का स्वागत किया है, जबकि पीड़िता के समर्थकों ने इसे न्याय के साथ धोखा बताया है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राजस्थान हाई कोर्ट तीन महीने में सुनवाई पूरी करता है या नहीं। अगर हाई कोर्ट समय पर सुनवाई पूरी नहीं कर पाता है, तो आसाराम की जमानत पर फिर से संकट के बादल मंडरा सकते हैं। लेकिन अभी तक, आसाराम के लिए यह एक बड़ी राहत है और उन्हें जमानत मिलने के बाद उन्हें थोड़ी राहत मिली है।
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