
उत्तराखंड के रेस्क्यू सेंटर में गुलदारों के लिए शाही भोजन: मंगलवार को उपवास पर रहते हैं, सरकार के साल में एक करोड़ रुपए हो रहे खर्च
उत्तराखंड में ज्यादातर क्षेत्र जंगल से जुड़े हुए हैं, जहां हजारों की संख्या में वन्यजीव मौजूद हैं। लेकिन कुछ वन्य जीव ऐसे होते हैं जो आमजन के लिए खतरा बन जाते हैं। ऐसे में इन वन्यजीवों को पकड़कर हरिद्वार के चिड़ियापुर स्थित रेस्क्यू सेंटर में रखा जाता है। यहां पर गुलदारों के लिए शाही भोजन की व्यवस्था की गई है, जिसमें मंगलवार को उपवास पर रहते हैं। सरकार के साल में एक करोड़ रुपए हो रहे खर्च के बावजूद, यहां पर गुलदारों की देखभाल के लिए वेटरनरी डॉक्टरों की टीम मौजूद रहती है।
रेस्क्यू सेंटर में सिर्फ भोजन पर ही खर्च नहीं होता, बल्कि इनकी दवाइयों, मेडिकल जांच, बाड़ों की साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था और सेंटर के संपूर्ण रखरखाव पर भी अलग से खर्च आता है। रेस्क्यू सेंटर में जानवरों की गतिविधियों और व्यवहार पर वन्यजीव विशेषज्ञों और डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी रखती है। इनकी देखरेख में खर्चा इतना अधिक है कि इनकी डाइट में ही 1200 रुपए प्रतिदिन खर्च किए जाते हैं और बात सालाना की करें तो एक करोड़ से अधिक पूरे साल रेस्क्यू सेंटर में इन वन्य जीवों की देखरेख में खर्च हो जाते हैं।
वर्तमान में रेस्क्यू सेंटर में 21 गुलदार मौजूद हैं। इनकी देखभाल के लिए वेटरनरी डॉक्टरों की टीम मौजूद रहती है। हरिद्वार के डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि रेस्क्यू सेंटर में गुलदारों की देखभाल के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। मंगलवार को उपवास पर रहने वाले गुलदारों के लिए विशेष भोजन की व्यवस्था की जाती है। यहां पर गुलदारों की देखभाल के लिए वेटरनरी डॉक्टरों की टीम मौजूद रहती है, जो उनकी सेहत और व्यवहार पर निगरानी रखती है। रेस्क्यू सेंटर में गुलदारों की देखभाल के लिए सरकार क
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