
पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप से बरी हुए ब्रह्मोस साइंटिस्ट निशांत अग्रवाल ने अपने दर्दनाक अनुभवों को साझा किया है। उन्होंने बताया कि जब उन्हें गिरफ्तार किया गया, तो उन्हें लगा कि वे मर गए हैं। निशांत अग्रवाल पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया गया था, लेकिन सात साल के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने उन्हें जासूसी करने के आरोपों से बरी कर दिया।
निशांत अग्रवाल ने बताया कि उनकी गिरफ्तारी 8 अक्टूबर 2018 को हुई थी, जब वे अपने घर पर थे। उन्हें और उनकी पत्नी को यूपी और महाराष्ट्र की एटीएस ने पाकिस्तान को ब्रह्मोस मिसाइल की तकनीक लीक करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। निशांत अग्रवाल ने बताया कि उस समय वे अपने परिवार के साथ थे और परिवार वाले यह सब देखकर हैरान रह गए थे। उन्होंने कहा कि उसके बाद से आज तक उनकी फैमिली एक सामाजिक प्रेशर झेल रही है।
निशांत अग्रवाल ने बताया कि उन्हें 2017-18 में डीआरडीओ द्वारा यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। वे एनआईटी कुरुक्षेत्र से पढ़ाई करने वाले गोल्ड मेडलिस्ट हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्हें गिरफ्तार किया गया, तो उन्हें लगा कि वे अपना सब कुछ खो चुके हैं। लेकिन जेल ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया और उन्होंने अपने अनुभवों से सीखा है कि जीवन में कभी भी हार नहीं माननी चाहिए।
निशांत अग्रवाल ने कहा कि वे अब अपने जीवन को फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं और वे अपने परिवार और देश के लिए काम करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वे अपने अनुभवों से सीखे हुए सबक को दूसरों के साथ साझा करने की कोशिश करेंगे और वे देश के लिए काम करने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे।
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