
पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में एक अद्भुत और प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जहां 103 साल की पार्वती दास ने एसआईआर फॉर्म भरा और अपने मतदान के अधिकार का उपयोग करने के लिए तैयार हैं। यह घटना न केवल उनके उत्साह और देश के प्रति जिम्मेदारी को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि उम्र किसी भी व्यक्ति को अपने कर्तव्यों को निभाने से नहीं रोक सकती।
पार्वती दास का जन्म 12 अगस्त 1923 को हुआ था और वह राज्य की सबसे बुजुर्ग मतदाताओं में शामिल हैं। 2002 से लेकर अब तक हर चुनाव में उनका नाम मतदाता सूची में मौजूद है, जो उनके देश के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्य की भावना को दर्शाता है। उनके पति का निधन कई साल पहले हो चुका है, लेकिन वह अपने बेटे, बहू और अन्य रिश्तेदारों के साथ रहती हैं और अपने परिवार के साथ जीवन को जी रही हैं। पार्वती दास की उम्र अधिक होने के कारण चलने-फिरने में परेशानी होती है और आंखें भी कमजोर हो चुकी हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने अपने मतदान के अधिकार का उपयोग करने के लिए तैयार हैं।
राज्य में चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया तेजी से चल रही है, जिसमें बीएलओ और बीएलए ने पार्वती दास के घर जाकर उन्हें सम्मानित किया। उन्हें गले में उत्तरिया पहनाया गया और हाथ में गुलाब का फूल दिया गया, जो उनके उत्साह और देश के प्रति जिम्मेदारी को दर्शाता है। सम्मान पाने के बाद पार्वती दास ने कहा, “मैंने पहले भी वोट दिया है, और इस बार भी जरूर वोट दूंगी। मैं देश का कल्याण चाहती हूं।” उनकी बात सुनकर वहां मौजूद अधिकारी भी भावुक हो गए, जो उनके देश के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्य की भावना को दर्शाता है।
पार्वती दास की यह घटना न केवल हमें देश के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्य की भावना को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि उम्र किसी भी व्यक्ति को अपने कर्तव्यों को निभाने से नहीं रोक सकती। यह घटना हमें सभी को अपने
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